बेंगलुरु की राही राज और प्रीति राज का अभिनंदन किया गया दिल्ली में सविता चडढा जन सेवा समिति द्वारा

कलश फाउंडेशन बेंगलुरु के संस्थापक और कवि और उनके साथ पधारी प्रीति राज का अभिनंदन सम्मान किया गया सविता चड्डा जन सेवा समिति के द्वारा। नयी दिल्ली : राष्ट्रीय ख्यातिनाम साहित्यकार,पत्रकार और लेखक सविता चढ्ढा (दिल्ली )को तुलसी सम्मान देने के लिए बेंगलुरु से पधारे थे राही राज। रानीबाग,दिल्ली के सविता चढ्ढा जन सेवा समिति … Read more

hindi kavita sine media darpan /सिने – मीडिया दर्पण|

हिंदी  रचनाकार का प्रयास रहता है hindi kavita sine media darpan समाज से जुडी कविता पाठकों के सामने प्रस्तुत हो  वरिष्ठ साहित्यकार सीताराम चौहान पथिक की रचना सिने – मीडिया दर्पण उस कथन को चरित्रार्थ  कर रही हैं । २०२० में ऐसा ही हुआ जब जाने- माने अभिनेता ने अपने मायानगरी निवास पर आत्महत्या कर … Read more

 तुम धुआं हवन का हो जाते/ सृष्टि कुमार श्रीवास्तव

तुम धुआं हवन का हो जाते  कुछ प्रश्नो के उत्तर होते हैं कुछ प्रश्न स्वयं उत्तर होते।   लहरें आ आ कर टकराती तन मन को बोझिल कर जातीं फिर गीत घुमड़ते सीने मेँ आँखें आंसू से भर आतीं   ऐ काश नदी तुम हो जाते हम घाटों के पत्थर होते।   सब कुछ कहकर … Read more

bhaasha aur aadamee-भाषा और आदमी/डॉ० सम्पूर्णानंद मिश्र

भाषा और आदमी (bhaasha aur aadamee) कविता डॉ० सम्पूर्णानंद मिश्र की रचना है बिना भाषा के मानव अपने विचारों को प्रकट नहीं कर सकता है इस कविता मे भी उन्ही भावों को लेखक ने कविता मे प्रकट किया है ।भाषा के बिना आदमी सर्वथा अपूर्ण है और अपने इतिहास तथा संस्कृति से विछिन्न है । … Read more

hindi kavita shabd pujaaree-शब्द का हूं मै  पुजारी

वरिष्ठ कवि सृष्टि कुमार श्रीवास्तव की’हिंदी कविता शब्द का हूं मै  पुजारी-hindi kavita shabd pujaaree हिंदी रचनाकार के पाठकों के लिए प्रस्तुत है। कविता मे लेखक ने अपने अनुभवों को पक्तियों के माध्यम से हिंदी कविता शब्द का हूं मै  पुजारी-  मे पिरोया है पाठक कविता को समझे और अपने भाव कमेंट के रूप मे … Read more

best hindi kavita- दया शंकर पाण्डेय

हिंदी रचनाकार के मंच पर best hindi kavita-डॉ. दया शंकर पाण्डेय की पांच कवितायें पढ़ेंगे जो आपको अपने पुराने दिनों की यादों मे प्रवेश कर देगा आपको पसंद आये तो अवश्य शेयर करे |   1.अनुभूति प्रेम की अनुभूति हो तुम किसलयों सी प्रणय की संप्रीति हो तुम विच्छुरित होती कहाँ हो प्रेम-पथ से, हृद-निलय … Read more

सौगात – अरविंद जायसवाल

सौगात आज आजाद हैं हम खुले आसमां, पंक्षियों की तरह हम गगन छू रहे। खत्म हैं बंदिशें बेकरारी नहीं, आज अपने वतन से गले मिल रहे। आज आजाद हैं हम खुले आसमां, पंक्षियों की तरह हम गले मिल रहे। आज का दिन समर्पण सुहाना तुम्हें, आज मिट जाने दो सारे शिकवे गिले। जिन शहीदों ने … Read more

अहं ब्रह्मास्मि-डॉ.संपूर्णानंद मिश्र

अहं ब्रह्मास्मि   जिन्हें इंकार है उसके अस्तित्व से ही और जो माने बैठे हैं मूरत में सूरत में मंदिर मस्जिद गिरजे में काशी क़ाबा पोथी में सब ख़तरनाक हैं क्योंकि वे हिस्सा हैं एक ख़तरनाक खेल का वे लेते हैं ठेका या दिखाते हैं ठेंगा मिट्टी को पकड़ो या आसमान को आस्तिक कहाओ नास्तिक … Read more

अनुभूति की अभिव्यक्ति-आकांक्षा “सिंह अनुभा”

अनुभूति (Feeling) किसी एहसास को कहते हैं। यह शारीरिक रूप से स्पर्श, दृष्टि, सुनने या गन्ध सूंघने से हो सकती है या फिर विचारों से पैदा होने वाली भावनाओं से उत्पन्न हो सकती है। संस्कृत मैं ‘अनुभूति’, ‘अनुभव’ का समानार्थी है। इसका अभिप्राय है साक्षात, प्रत्यक्ष ज्ञान या निरीक्षण और प्रयोग से प्राप्त ज्ञान  में छायावाद काल नया … Read more

खनकै शरद कै कंगनवा -शिव नारायण मिश्र

सुहानी शरद ऋतु के आने पर आंगन में (खुले स्थान से तात्पर्य है घर में खुलापन तो होता ही है )इससे ठंडक का अनुभव होता है ,प्रतीत होता है कि जाड़ा आंगन में झांक रहा है- शरद ऋतु के कंगन की खनक सुनकर। आंगन में कोई और भी तो झांकता है ।किसी की आहट को … Read more