अतीत के झरोखे से /सम्पूर्णानंद मिश्र

अतीत के झरोखे से /सम्पूर्णानंद मिश्र आज दिनांक 7 सितंबर का दिन मेरी ज़िन्दगी का अहम दिन है। 7 सितंबर 2002 दिन शनिवार को जम्मू-कश्मीर में अवस्थित केन्द्रीय विद्यालय किश्तवाड़, जिसे केन्द्रीय विद्यालय संगठन की स्थानांतरण नियमावली में कठिन क्षेत्र माना जाता है, में मैंने बतौर स्नातकोत्तर शिक्षक हिंदी, कार्यभार ग्रहण किया था। बेरोज़गारी के … Read more

किस्सा एक मुलाकात का (संस्मरण) | आशा शैली

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किस्सा एक मुलाकात का (संस्मरण) | आशा शैली पहली बार जब साहित्य मंच के कार्यक्रम में भाग लेने जालन्धर गई, तब मेरा परिचय मंच के अध्यक्ष जगदीश चन्षद्र से हुआ। उनका निवास माडल टाउन में था। मेरे रुकने की व्यवस्था स्काई लार्क होटल में की गई थी। मैं संस्था के सचिव प्रोफेसर मेहर गेरा के … Read more

हिमाचल की भीमाकाली और सराहन / आशा शैली

हिमाचल की भीमाकाली और सराहन / आशा शैली हिमाचल प्रदेश का मन्दिरों और देवस्थानों से ओत-प्रोत अपूर्व प्राड्डतिक दृश्य है मन को आनन्द से भर देने वाला। नीचे-ऊपर पहाड़ ही पहाड़, झरने, नदियाँ, चारों ओर पिघलती बर्फ लेकर पर्वत शृंखलाएँ ऐसी, जैसे ईश्वर कुछ संदेशा लिखकर लोगों तक पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसी … Read more

मेरी जम्मू-कश्मीर यात्रा | आशा शैली

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यात्राएँ करना सम्भवतया मेरा स्वभाव ही बन गया है अथवा नियति, लेकिन परिस्थितियों के उतार-चढ़ाव और देश की वर्तमान परिस्थितियों में सोच भी नहीं सकती थी कि कभी मुझे कश्मीर भी जाने का सौभाग्य प्राप्त होगा। जब से होश सँभाला है सुनती आई थी कि धरती पर कहीं स्वर्ग यदि है तो वह कश्मीर में … Read more

संस्मरण | हिंदी साहित्य | आशा शैली

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संस्मरण | हिंदी साहित्य | आशा शैली पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश के चर्चित उपन्यासकार प्रोफेसर गंगाराम राजी का सद्य प्रकाशित ऐतिहासिक उपन्यास एक थी रानी खैरागढ़ी हाथ आया। उपन्यास था, वह भी एक प्रोफेसर का लिखा हुआ, तो रोचकता भी होनी ही चाहिए। सो, उठते-बैठते पढ़ डाला।मण्डी रियासत की रानी रही है यह रानी खैरागढ़ी … Read more

पूस की रात | संस्मरण | आशा शैली

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एक संस्मरण याद आ गया, वही देखिए। पूस की रात बर्फबारी दोपहर से ही शुरू हो गई थी फिर भी पाँच-छः बजे तक जमी नहीं थी। जीव-जंतु, पशु कोई भी तो खुले में नज़र नहीं आ रहा था। वर्षा शुरू होते ही सब अपने अपने बसेरों में दुबक गये थे। हमारे पहाड़ी गाँव में सन्नाटा … Read more

संस्मरण | आज फिर कुछ याद आया / आशा शैली

आज फिर कुछ याद आया / आशा शैली जिस दिन से ‘लोनली मदर’ फिल्म की शूटिंग हुई है, जीवन में कई नए अध्याय खुलने लगे हैं। कभी सोचा भी नहीं था कि मैं भी अभिनय कर सकती हूँ। बचपन में छटी कक्षा में एक अवसर मिला था, परन्तु घर से स्वीकृति नहीं मिली। गोल मेज़ … Read more

दरवेश भारती के साथ आखिरी मुलाकात -आशा शैली

दरवेश भारती के साथ आखिरी मुलाकात -आशा शैली संस्मरण आशा शैली के साथ  पुरानी बात है, मैं हरियाणा के किसी मुशायरे से वापस लौट रही थी। अम्बाला रास्ते में हो और मैं डॉ महाराज कृष्ण जैन परिवार से मिलने न जाऊँ यह तो हो ही नहीं सकता। रात अम्बाला रुक कर मैं दूसरे दिन जिस … Read more

डॉ. नरेश कुमार वर्मा के साथ : अविस्मरणीय पल/ डॉ.रसिक किशोर सिंह नीरज

डॉ. नरेश कुमार वर्मा के साथ : अविस्मरणीय पल साहित्यकार डॉ नरेश कुमार वर्मा का परिचय  भाषाविद्, समीक्षक, साहित्यकार डॉ नरेश कुमार वर्मा जी शासकीय गजानंद अग्रवाल स्नातकोत्तर महाविद्यालय भाटापारा में हिंदी विभागाध्यक्ष, पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर एवं साकेत साहित्य परिषद सुरगी राजनादगांव के प्रमुख सलाहकार थे। आपका जन्म एक साधारण कृषक परिवार में 13 … Read more

साक्षात्कार: साहित्यकार श्रीमती सविता चड्ढा का

साक्षात्कार: साहित्यकार श्रीमती सविता चड्ढा का डॉ कल्पना पांडेय ने पूछे जीवन से संबद्ध कुछ अनिवार्य प्रश्न साहित्यकार श्रीमती सविता चड्ढा से और उनके उत्तर सार्थक और सारगर्भित….. डॉ कल्पना पांडेय द्वारा साक्षात्कार प्रश्न 1.कभी-कभी जीवन में सब कुछ होते हुए भी व्यक्ति तन्हा क्यों महसूस करता है? उत्तर: इस जीवन में किसी भी व्यक्ति … Read more