Jigyasa-जिज्ञासा/सीताराम चौहान पथिक


Jigyasa

जिज्ञासा


कब जीवन की संध्या होगी ॽ
कब जीवन का नव – प्रभात ।
यह अनन्त का गूढ़ प्रश्न है ,
समाधान अब तक अज्ञात ।

चेतन तत्व आत्मा जिसका ,
आदि- ॳत ना ओर ना छोर।
तन विशाल से उड़ा गगन में ,
हुआ विलीन विराट की ओर।

तन्त्र – मंत्र आध्यात्म सभी ,
मानव के आत्म-तत्व पर मौन
कैसी है रहस्यमयी आत्मा ॽ
मॄत्यु बाद ॽ सब साधे मौन ।

कैसा है वह अमर तत्व ॽ
गीता ने परम ब्रह्म बतलाया।
वहीं तत्व मानव में – यद्यपि ,
मानव अमर नहीं बन पाया।

तन निर्जीव — तत्व जब छूटा ,
विज्ञान दीखता है निरुपाय ।
कोई यन्त्र श्वास लौटा दे ,
वैज्ञानिक कर रहे उपाय ।

विज्ञान – यन्त्र कोई ना बना,
जो प्राण – तत्व को लौटा दे।
तन में तन की अद्भुत रचना ,
कैसे सम्भव ॽ यह समझा दे ।

ऐसे अबूझ अनगिनत प्रश्न ,
विज्ञान – शोध चल रही मगर।
कुछ अधर बीच कुछ अनसुलझे ,
जिज्ञासाओं की कठिन डगर।

Jigyasa 
सीताराम चौहान पथिक

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Abhimanyu

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