बिहार में विद्या वाचस्पति सम्मान से सम्मानित हुए जिले के प्रख्यात अवधी विद्वान इंद्रेश भदौरिया

साहित्य के क्षेत्र में रायबरेली जिले का नाम भी स्वर्णिम अक्षर से लिखा जाता है वर्तमान में अवधी भाषा के प्रख्यात विद्वान इंद्रेश बहादुर सिंह भदौरिया को बिहार में वाचस्पति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है l

मूल रूप से हरचंदपुर क्षेत्र के निवासी इंद्रेश कुमार भदौरिया अवधी भाषा के प्रख्यात विद्वान हैं उनकी कई पुस्तक अब तक प्रकाशित हो चुकी है कई बड़े-बड़े मंचों पर अपना लोहा अवधि भाषा के क्षेत्र में मनवा चुके इंद्रेश कुमार भदौरिया को बिहार प्रदेश में विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ विश्वविद्यालय के तत्वाधान में आयोजित एक मंड सम्मान कार्यक्रम में विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया गया है l

इंद्रेश कुमार भदौरिया की कई पुस्तक ऐसी है जिन पर विशेष रूप से शोध भी हो रहा है क्योंकि उन्होंने अवधी भाषा को एक स्थान दिलाने के लिए प्रयास किया है l

पुरस्कार प्राप्त करने वाले इंद्रेश कुमार भदौरिया का कहना है कि जिस तरह भोजपुरी अब बुंदेली भाषा को महत्व दिया जाता है वैसे ही अवधी भाषा को भी महत्व देना चाहिए क्योंकि यह मीठी भाषा अवध क्षेत्र के गांव में बोली जाती है लेकिन शहर के लोग इसे बोलने में संकोच करते हैं जबकि घर के अंदर इसी भाषा का उपयोग आपस में बात करने के लिए किया जाता है तो क्यों ना इस भाषा को प्रचारित और प्रसारित करके सामाजिक जीवन में भी बोलने के लिए प्रयोग किया जाए l

वाचस्पति पुरस्कार से सम्मानित होने पर जिले के साहित्यकार भाषा सलाहकार डॉ संतलाल, पुष्पा श्रीवास्तव शैली, अशोक कुमार, डॉक्टर प्रियंका, रत्ना भदौरिया और कल्पना अवस्थी ने इंद्रेश भदौरिया को शुभकामनाएं दी है l

सविता चड्ढा द्वारा लिखी पुस्तक”हिंदी पत्रकारिता भूमिका और समीक्षा” का लोकार्पण और उनकी कहानियों पर चर्चा संपन्न

New Delhi: “हिंदी पत्रकारिता भूमिका एवं समीक्षा’ का लोकार्पण पंजाब केसरी की चेयरपर्सन श्रीमती किरण चोपड़ा,श्री अनिल जोशी, श्री ऋषि कुमार शर्मा ,डाॅ. मुक्ता, ओमप्रकाश प्रजापति एवं मनमोहन शर्मा जी के कर कमलों से संपन्न हुआ। लेखिका सविता चड्ढा ने उपस्थित सभी माननीय अतिथियों का हार्दिक अभिनंदन और स्वागत करते हुए कहा कि उनका लेखन अपने पाठकों और शुभचिंतकों शुभकामनाओं और आशीर्वाद से ही संभव हो पता है । उन्होंने अपने प्रकाशकों का भी आभार व्यक्त किया सदैव उनकी पुस्तकें प्रकाशित करने के लिए तत्पर रहते हैं।

पंजाब केसरी की चेयरपर्सन और वरिष्ठ नागरिक केसरी क्लब की संस्थापिका ने लेखिका के लेखन की भरपूर सराहना की। उनके द्वारा लिखी गई साहित्य के विभिन्न विधाओं की पुस्तकों का उल्लेख करते हुए आज लोकार्पित हिंदी पत्रकारिता भूमिका और समीक्षा पुस्तक की विशेष रूप से सराहना की।
श्री अनिल जोशी ने भी इस अवसर पर अपनी शुभकामनाएं लेखिका को देते हुए उनके बहुआयामी व्यक्तित्व पर चर्चा करते हुए उनके द्वारा लिखी गई विभिन्न कृतियों की चर्चा की और उनके साहित्यिक सफर का उल्लेख करते हुए उन्हें शुभकामनाएं प्रदान की ।

हिंदी अकादमी के उप सचिव श्री ऋषि कुमार शर्मा ने कहा “
सविता चड्ढा जी ने विभिन्न विषयों पर अपनी लेखनी चलाई है। इनका कहानी संग्रह “नारी अंतर्वेदना की कहानियाँ ” में एक सशक्त नारी का आधुनिक रूप निखर कर आया है। ये कहानियाँ कालजयी है जो समाज की समस्या के ऊपर दृष्टिपात करके उनका समाधान भी देती हुई चलती है । समाज, परिवार और पाठकों के द्वारा इन कहानियों का पढ़ा जाना आवश्यक है। ये कहानियाँ हिंदी साहित्य की धरोहर हैं। इस संग्रह की कुछ कहानियाँ मेरी साहित्य की समझ का विकास करती हैं।”
इस अवसर पर डॉक्टर मुक्ता, डाॅ, ओमप्रकाश प्रजापति, श्री मनमोहन शर्मा जी ने लेखिका के साहित्यिक सफर का उल्लेख करते हुए उनकी प्रकाशित विभिन्न पुस्तकों का उल्लेख किया और आज की पुस्तक “हिंदी पत्रकारिता: भूमिका और समीक्षा” को पत्रकारों के लिए और लेखकों के लिए बहुत उपयोगी बताया ।

” नारी अस्मिता व अंतरवेदना की कहानियां” संग्रह पर चर्चा के प्रारंभ में मंच संचालन करते हुए डॉ. कल्पना पांडेय ‘नवग्रह’ ने कहा ” सविता चड्ढा की कहानियाँ नारी सशक्तिकरण के लिए अंतरात्मा से उठी हुई वो आवाज़ है जो न केवल एक दूरदृष्टि देती है बल्कि संवेदनाओं के तार भी झंकृत करती है। दिशा देती , ख़ुद से पहचान कराती भावपूर्ण कहानियाँ।”
डॉ पुष्पा सिंह बिसेन ने कहा सविता चड्ढा की शख्सियत, व्यक्तित्व और कृतित्व बहुत विशाल है। उन्होंने सभा को सूचित किया कि वह सविता चड्ढा के संपूर्ण व्यक्तित्व पर पर एक खंडकाव्य लिख रही है । इस सुखद सूचना को सुनकर सभी ने कर्तल ध्वनि से उनके निर्णय का स्वागत किया ।
उमंग सरीन ने संग्रह की तीन चार कहानियों का उल्लेख किया । उन्होंने कहानी “बिब्बो”, “दिल्ली में भी है” और “फिलिपिनो” पर अपने विचार प्रकट किये।
“शकुंतला मित्तल ने कहानियों पर बोलते हुए कहा “नारी अन्तर्वेदना की कहानियाँ” वेदना,और पीड़ा को झेलते हुए भी स्वाभिमान रख कर संघर्ष करती उन नारियों की कहानियां हैं,जो संघर्ष में ही समाधान खोज अपना जीवन मार्ग तलाशती हैं।
पात्रों के चरित्र को समझ उसके मनोविज्ञान को गढ़ने में कुशल डॉ सविता चड्डा जी बोल्ड कथ्य को मर्यादित और सधी भाषा में मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति देने में पूर्णतया सक्षम हैं, इसलिए इनका पाठकों पर दूरगामी प्रभाव पड़ता है।

इस अवसर पर पुस्तक पर बोलते हुए डॉक्टर कविता मल्होत्रा ने कहा “सविता जी की कहानियां महिला सशक्तिकरण का सकारात्मक पक्ष उजागर करती हैं।सविता जी का कहना है कि यदि महिलाएँ स्वंय अपना आत्म निरीक्षण करना शुरू कर दें तो उनकी हर समस्या का समाधान हो सकता है, क्यूँकि महिलाओं की अस्मिता पर होने वाले सामाजिक प्रहारों को कोई एन. जी. ओ.,कोई प्रशासन या कोई सरकार नहीं रोक सकती, इसलिए सभी महिलाओं को स्वाभिमानी और स्वंयसिद्धा होने का संदेश देती सविता जी की हर कहानी प्रणम्य है।सविता जी को उनकी कृतियों के विमोचन की हार्दिक बधाई।”
श्री अमोद कुमार ने कहा “सविता जी ने जहाँ नारी के भिन्न रिश्तों मे हो रहे उत्पीड़न और उसके अंर्तमन की वेदना को अपनी कहानियों मे उजागर किया है वहीं नारी को संघर्षशील होकर अपने पैरों पर खड़े होकर स्वाभिमान का जीवन जीने की प्रेरणा भी दी है।

डाॅ. शुभ्रा अपनी लिखित एक विस्तृत समीक्षा लेखिका को प्रदान की और कुछ कहानियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने संग्रह की कहानियों को पतठनीय और समाजोप योगी बताया।
शारदा मित्र और आमोद कुमार ने कहानियों पर अपने विचार व्यक्त करते हुए सविता चड्ढा की कहानियों को समाजोपयोगी बताया और इसमें नारी चेतना के विभिन्न स्वरों को प्रस्तुत करते हुए संग्रह की सभी कहानियों व्याख्या प्रस्तुत की ।
श्रीमती सरोज शर्मा, श्रीमती प्रमिला भारती , शारदा मित्तल , डॉ कविता मल्होत्रा , श्री राजेंद्र नटखट,अंजू क्वात्रा, कुमार सुबोध ने लेखिका को अपनी शुभकामनाएं और बधाई दी, वहीं पधारी रंजना मजूमदार ने सविता चड्डा की एक खूबसूरत ग़ज़ल को स्वर देखकर सभी को मंत्र मुग्ध कर दिया।

विद्या प्रेम संस्कृति न्यास द्वारा डॉ सविता चडढा सुप्रसिद्ध साहित्यकार को मिला प्रेम रत्न सम्मान”

नयी दिल्ली : कार्यक्रम के प्रारंभ में विद्या प्रेम संस्कृति न्यास की ओर श्रीमती विद्या पांडेय ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस वर्ष का “प्रेम रत्न सम्मान” डॉ श्रीमती सविता चडढा, सुप्रतिष्ठित साहित्यकार को दिया गया। प्रेम-रत्न’ से सम्मानित डॉ. सविता चड्ढा ने सम्मान के प्रति आत्मीयता भरे शब्द कहे। उन्होंने कहा कि है ‘प्रेम रत्न’ सम्मान डॉ. कल्पना पांडेय के पिता श्री प्रेम किशोर पांडेय जी को समर्पित है इसलिए आज से इस वे भी डॉ कल्पना पांडेय के लिए पिता तुल्य हो गईं हैं । उन्होंने स्वर्गीय श्री प्रेम किशोर पांडेय की कविता “तुझको क्या हो गया बनारस “की कुछ पंक्तियां भी पढ़ीं-किसकी…..किसकी काली छाया पड़ी कि तू असहाय हो गया, अपनी संस्कृति की रक्षा में क्यूंकर तू निरुपाय हो गया।”

श्री अजीज सिद्दीकी, श्री अनिल जोशी, श्री एस जी एस सिसोदिया ,पंडित सुरेश नीरव ,श्री रामस्वरूप दीक्षित ,डॉ पुष्पा सिंह बिसेन की उपस्थिति ने कार्यक्रम को ऊंचाइयां प्रदान की ।

उल्लेखनीय है कि श्रीमती सविता चड्ढा वर्ष 1984 से लेखन कार्य कर कर रही है और विभिन्न विधाओं पर आप की अब तक 50 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हैं।

आपका लेखन बहुआयामी है आपके 17 कहानी संग्रह, 12 पत्रकारिता विषयक पुस्तकें प्रकाशित है जिनमें से चार विभिन्न संस्थानों में पाठ्यक्रम में संस्तुत हैं, 11 लेख संग्रह, 2 उपन्यास ,11 काव्य की पुस्तकें तो प्रकाशित हैं ही । समय-समय पर आप आपकी कहानियों पर टेली फिल्में बनी है ,नाटक मंचन हुए हैं, अनुवाद हुए हैं, आपकी कहानियों पर शोध कार्य संपन्न हो चुके हैं । राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपके लेखन को समाजोपयोगी स्वीकार किया गया है । आपके साहित्यिक यात्राओं का उल्लेख किया जाए तो विभिन्न संस्थाओं में आपकी सक्रियता और उपस्थिति ने साहित्य को नई ऊंचाइयों प्रदान की है। आपकी निरंतर साहित्य साधना के लिए आपको विभिन्न संस्थाओं द्वारा समय-समय पर सम्मानित किया गया है और आप इन सभी सामानों के लिए ईश्वर का, पाठकों का आभार व्यक्त करती हैं। आपका कहना है मिलने वाले पुरस्कार और सम्मान आपको भविष्य में श्रेष्ठ और अच्छे लेखन के लिए उत्साहित करते हैं।
इस अवसर पर डॉ कल्पना पांडेय ‘नवग्रह ‘ द्वारा संपादित पुस्तक “तुझको क्या हो गया बनारस” के अनावरण का लोकार्पण भी हुआ । कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती शकुंतला मित्तल जी ने किया।

सभा में उपस्थित सभी प्रबुद्ध जनों में श्री अतुल प्रभाकर, डॉ शारदा मिश्रा, श्रीमती स्मिता श्रीवास्तव , श्रीमती वीना अग्रवाल, श्रीमती चंचल वशिष्ठ श्रीमती निरंजन शर्मा, श्री सरोज जोशी, श्री संजय गर्ग, श्री कुमार सुबोध, ने उपस्थित होकर आज के कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाया। अंत में आयोजन में आए हुए सभी अतिथियों का दिल से धन्यवाद देते हुए विद्या-प्रेम संस्कृति न्यास के संरक्षक डॉ. आर. के. सिंह ने किया सभी का आभार व्यक्त किया।

दिल्ली में 11 मार्च को होगा भारतीय महिला शक्ति सम्मान समारोह
  • देशभर की पच्चीस महिलाएं होंगी सम्मानित
  • सविता चड्ढा का होगा सार्वजनिक अभिनंदन

नई दिल्ली : भारतीय महिला शक्ति सम्मान समारोह सावित्तीबाई सेवा फाउंडेशन पुणे अंग जन गण और मेरा गांव मेरा देश फाउंडेशन द्वारा 11 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के परिप्रेक्ष्य में और सावित्रीबाई फुले की पुण्यतिथि पर
नई दिल्ली स्थित गांधी शांति प्रतिष्ठान के सभागार में आयोजित किया जा रहा है।
यह जानकारी देते हुए सावित्रीबाई सेवा फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रसून लतांत , सचिव हेमलता म्हस्के और अंग जन गण के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा सुधीर मंडल ने कहा कि सावित्री बाई फुले की स्मृति में यह सम्मान इसलिए दिया जाता है क्योंकि वे भारतीय महिलाओं के लिए एक अति उज्ज्वल आदर्श है। उन्होंने देश में तब लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोला जब लड़कियों को पढ़ाना पाप समझा जाता था। आज महिलाएं पढ़ लिख कर आगे बढ़ गई हैं लेकिन बहुत से मामलों में उनके साथ भेदभाव बरता जाता है। आज समाज को बार बार यह अहसास दिलाने की जरूरत है कि महिलाएं भी कम नहीं हैं। उन्हें भी उनके अधिकार दिए जाएं उनकी गुणवत्ता और कुशलता को मान सम्मान दिया जाना चाहिए।

यह सम्मान शिखर महिला और पदमश्री डा शीला झुनझुनवाला, के सान्निध्य में पंजाब केशरी न्यूज प्रा लिमिटेड की चेयर पर्सन और मुख्य अतिथि किरण चोपड़ा अतुल प्रभाकर, प्रसिद्ध समाज सेवी इंद्रजीत शर्मा , पदमश्री डा संजय , अज़ीज़ सिद्दिकी ,डा ममता ठाकुर मिल कर देंगें।
इस मौके पर वरिष्ठ लेखिका और समाजसेविका डा सविता चड्ढा का सार्वजनिक अभिनंदन किया जाएगा। अनेक सम्मानों और पुरुस्कारों से सम्मानित डा सविता चड्ढा का साहित्य और समाज में योगदान सराहनीय है। महिलाओं के लिए वे आदर्श हैं कि कैसे वे संघर्षों से जूझती हुई अपने मुकाम पर पहुंची। इस समारोह में जिनको भारतीय महिला शक्ति सम्मान से सम्मानित किया जाएगा उनके नाम इस प्रकार हैं।
1.नंदिनी जाधव – पुणे – महिला सशक्तिकरण
2.रत्ना भदौरिया – दिल्ली – साहित्य
3.सांत्वना श्रीकांत – दिल्ली – साहित्य
4.दीपिका तिर्की – जहारखंड – शिक्षा
5.मनीषा धुर्वे – मध्यप्रदेश – शराबबंदी
6.नूतन पांडेय – दिल्ली – पूर्वोत्तर साहित्य
7.शारदा बेन मगेरा – गुजरात – शिक्षा
8.कपना पांडे नवग्रह – दिल्ली – साहित्य
9.डा.श्र्वेता – बिहार – शिक्षा
10.सिनीवाली गोयल – छत्तीसगढ़ – समाज कल्याण
11.वसुधा कनुप्रिया – दिल्ली- साहित्य एवं समाज सेवा
12 डा.जुही बिरला- उत्तर प्रदेश – शिक्षा
13.पुष्पा राय – दिल्ली – समाज सेवा
14.दमयंती बेन गमेती – गुजरात – लोक गायन
15.डॉ.अनीता कपूर – अपेरिका – साहित्य
16.अंजु खरबंदा – दिल्ली – लेखन
17.डी.एम.एस.मधुभाषिणी कुलसिंह (सुगंधि) – श्रीलंका – हिंदी
18.कल्पना झा- दिल्ली – साहित्य
19.मधु बेरिया साह – उत्तराखंड – लोक गायन
20.बाल कीर्ति- दिल्ली – साहित्य
21.संध्या यादव, मुंबई – साहित्य
22.डॉ.पुष्पा जोशी – उत्तराखंड – महिला सुशक्तिकरण
23.स्मिता जिंदल – पंजाब – बाल शिक्षण
24 मिलन धुर्वे मध्य प्रदेश समाज सेवा
25 नाज़नीन अंसारी, साहित्य, दिल्ली

शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान शाहाना परवीन को मिला
  • कला-संस्कृति,साहित्य और सामाजिक सरोकारों को समर्पित सविता चड्ढा जन सेवा समिति ने दिए चार सम्मान
  • हीरों में हीरा सम्मान प्रसून लतांत
  • साहित्यकार सम्मान डॉ संजीव कुमार
  • शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान शाहाना परवीन
  • गीतकारश्री सम्मान रंजना मजूमदार

नयी दिल्ली : सविता चड्ढा जन सेवा समिति, दिल्ली द्वारा हिन्दी भवन में चार महत्वपूर्ण सम्मान प्रदान किए गए । अपनी बेटी की याद में शुरू किए सम्मानों में, अति महत्वपूर्ण “हीरों में हीरा सम्मान” इस बार गांधीवादी विचारक प्रसून लतांत को, साहित्यकार सम्मान साहित्यकार एवं प्रकाशक डॉ संजीव कुमार और शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान शाहाना परवीन और रंजना मजूमदार को गीतकारश्री सम्मान महामहोपाध्याय आचार्य इंदु प्रकाश और इंद्रजीत शर्मा के कर कमलों से प्रदान किया गया। अनिल जोशी और राजेश गुप्ता की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की । शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान समारोह की संस्थापक एवं महासचिव, एवं साहित्यकार सविता चड्ढा ने  शाहाना परवीन को सम्मान के साथ साथ पाँच हज़ार एक सौ रुपए की नकद राशि भी प्रदान की और देश भर से पधारे लेखकों, कवियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ये सम्मान माँ और बेटी के मधुर संबंधों को समर्पित है।

अपनी बेटी के लिए पिछले सात साल से प्रारम्भ इन सम्मानों के लिए सविता चड्ढा की सराहना 

इस अवसर पर प्रसून लतांत ने स्वयं को हीरों मे हीरा सम्मान दिये जाने पर समिति का आभार व्यक्त किया और सभा को संबोधित करते इन सम्मानों को दिए जाने को साहित्य में सकारात्मकता के रूप में लिए जाना कहा। अपनी बेटी के लिए पिछले सात साल से प्रारम्भ इन सम्मानों के लिए सविता  की सराहना की । इस अवसर पर डॉ.संजीव कुमार, डॉ स्मिता मिश्रा। शकुंतला मित्तल ने अपने विचार रखें और इन सम्मानों की निष्पक्षता और चुने जाने की प्रक्रिया अपनी बात कही ।

इस वर्ष प्राप्त पुस्तकों में से अन्य 14 लेखकों की पुस्तकों का चयन भी किया था। इस अवसर पर डॉ विनय सिंघल निश्छल को उनकी पुस्तक, संबंध, व्यक्त अव्यक्त,  नाज़रीन अंसारी को ,मां और लफ्जों का संगम पुस्तक के लिए ,. अर्चना कोचर, को तपती ममता में गूंजती किलकारियां संग्रह के लिए , आशमा कौल को स्मृतियों की आहट के लिए ,. राही राज को उनकी पुस्तक पिता के लिए,. कमल कपूर को जिएं तो गुलमोहर के तले, के लिए  रत्ना भादोरिया को “सामने वाली कुर्सी” के लिए ,डॉ पुष्पा सिंह बिसेन को उनके उपन्यास “भाग्य रेखा” के लिए,. अंजू कालरा दासन ‘नलिनी’ को उनके संग्रह “आईना सम्बन्धों का” के लिए , यति शर्मा को उनकी पुस्तक “आधी रात की नींद”,  हेमलता म्हस्के को “”अनाथों की माँ सिंधुताई” के लिए शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान समारोह ” में सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर जापान, लंदन, अमेरिका के आलावा दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, मध्य प्रदेश, लखनऊ,आगरा, राजस्थान, मुरादाबाद, इंदौर,बैंगलोर , पंजाब, नोएडा और दिल्ली के साहित्यकार और गणमान्य उपस्थित थे । कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ कल्पना पांडेय ने किया ।

Shilpi- chaddha- smriti- award
शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान-2023 प्रविष्ठियाँ आमंत्रित

शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान-2023 प्रविष्ठियाँ आमंत्रित

New Delhi : प्रत्येक वर्ष की भांति, इस वर्ष भी 12 दिसम्बर, 2023 को ‘’शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान’’ हिंदी भवन, दिल्ली में दिये जाने है। भारत वर्ष में रहने वाले, किसी भी आयु वर्ग के, महिला-पुरूष, लेखक इसमें भाग ले सकते हैं।

  • शिल्पी चडढा स्मृति सम्मान में भाग लेने के लिए संबंधों पर आधारित, (दिसंबर 2022 से नवंबर 2023 के दौरान प्रकाशित ) पुस्तकें आमंत्रित हैं (मां, पिता, देश, भाई, बहन आदि शीर्षक पर ),संबंधों पर प्रकाशित (किसी भी विधा पर ,काव्य संग्रह, लेख संग्रह,नाटक, उपन्यास, कहानी संग्रह आदि ) अपनी पुस्तक की दो प्रतियां कृपया निम्नलिखित पते पर भिजवांंये: सविता चड्ढा जन सेवा समिति (रजि), E.51, Deep Vihar, Rohini Sec.24 (आदर्श हॉस्पिटल के पास ), दिल्ली 110042.पर स्पीड पोस्ट /डाक से भेज सकते हैं। पुस्तक भेजने की सूचना, अपने परिचय और फोन नंबर, संपर्क पते के साथ मेल करना अनिवार्य है। (मेल savitawriter@gmail.com ).

आपकी पुस्तक मिलने के पश्चात आपको मेल पर पुष्टि कर दी जाएगी कि आपकी पुस्तक सम्मान हेतु प्राप्त हो गई है ।

  • शिल्पी चड्डा स्मृति सम्मान के अंतर्गत चयनित एक पुस्तक को सम्मान स्वरूप नकद धनराशि 5100 रूपये के साथ , प्रतीक चिन्ह, अंगवस्त्रम आदि गरिमामय समारोह में प्रदान किया जायेगा। प्राप्त पुस्तकों में से चुनी गई 10 अन्य पुस्तकों के लेखकों को भी इस सम्मान समारोह में सम्मानित किया जाएगा।

समारोह के बारे में सूचना आपको 15 नवम्बर, 2023 तक दे दी जायेगी।

  • उपरोक्तानुसार आप अपनी पुस्तकें अधिकतम 15 अक्टूबर , 2023 तक भेज सकते हैं।

डाँ. सविता चडढा
संस्थापक: शिल्पी चड्डा स्मृति सम्मान समारोह

‘आत्मनिर्भरता के साथ सम्मान की चाह’ : आरती जायसवाल

रायबरेली : पंजाब नेशनल बैंक द्वारा सिविल लाइन स्थित एक होटल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की संध्या को आयोजित समारोह के शुभअवसर पर उपस्थित जन को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि देश की सुप्रसिद्ध कथाकार आरती जायसवाल ने कहा कि महिला दिवस को मनाने का अर्थ महिलाओं की उपलब्धियों, उनके जज्बे, उनकी ऐतिहासिक यात्राओं और उनके जीवन को याद करना उनसे प्रेरणा लेना तथा स्वयं को सिद्ध करने की प्रतिज्ञा लेना है।’
प्रथम बार १९०८ ईसवी में अमेरिकी महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा समान कार्य के बदले कम पारिश्रमिक मिलने के विरुद्ध बड़ी संख्या में (लगभग पन्द्रह हजार महिलाएं )सड़कों पर उतरी और उसी के परिणाम स्वरूप सबसे पहले साल १९०९ईसवी में न्यूयॉर्क में एक समाजवादी राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में महिला दिवस का आयोजन किया गया था। फिर १९१७ईसवी में सोवियत संघ ने इस दिन को एक राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया। तब से धीरे-धीरे तमाम देशों में इस दिन को मनाने की शुरुआत हुई। अब लगभग सभी देशों में इसे मनाया जाता है।


आत्मनिर्भरता के साथ लैंगिक समानता की चाह में आज की नारी ने प्रत्येक क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। अंतरिक्ष से लेकर समुद्रतल तक उन्होंने खुद को सिद्ध किया है। समाज के बने – बनाए रूढ़िवादी ढांचे को चुनौती देते हुए अपने मार्ग में आने वाली समस्त बाधाओं को पार करते हुए विश्व भर की नारियां आज अपना परचम लहराने में सफ़ल हैं।


इस बार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की थीम है ‘ जेंडर एक्यूलटी टुडे फॉर सेस्टनेबल टुमारो ‘ जिसमें हम लैंगिक समानता की बात करते हैं और चाहते हैं कि मजबूत भविष्य के लिए हमारा आज सम्मान और आशा से भरा हुआ हो इसका तात्पर्य यह कदापि नहीं कि हम पुरुष जैसा बनना चाहते हैं ,ईश्वर ने सभी जीवों की रचना अलग की है और उसकी बनाई हुई प्रत्येक कृति अनमोल और अद्भुत है किसी से किसी की तुलना हो ही नहीं सकती । स्त्री – पुरुष दोनों महत्त्वपूर्ण है दोनों ही सम्मान के योग्य भी, समानता का तात्पर्य यहां सम्मान के भाव से है ,इसके लिए आवश्यक है ;कि समाज के विचारों में परिवर्त्तन हो और यह तभी सम्भव होगा जब किसी के घर में बेटी के जन्म पर भी बधाई दी जाए , इसकी शुरुआत हमें ही करनी होगी कि जब हम पुत्री को भी जन्म दें तो हमें सवा किलो लड्डू बांटने का अधिकार होना चाहिए ‘ बेटी के जन्म पर गर्व हो कि यह भी हमारे राष्ट्र का सुनहरा भविष्य है अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली कोई परी जन्मी है,कोई महान व्यक्तित्व जन्मी है ‘ जो न जाने किस क्षेत्र में अपने को सिद्ध करेगी। उसे हेय दृष्टि से न देखकर उसके प्रति आशान्वित और गौरवान्वित होते हुए जब यह समाज आगे बढ़ेगा तो नारी के मार्ग के अवरोध खुद समाप्त हो जायेंगे वे जितना अच्छा कार्य अभी कर रही हैं उससे भी अच्छा कार्य कर पाएंगी।
विकासशील परिवार और समाज से ही राष्ट्र विकसित होता है ,नारियों के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव आवश्यक है जिससे राष्ट्र के विकास और यश में निरंतर प्रगति होती रहेगी।
आइए खुद पर गर्व करते हुए अपने राष्ट्र को गौरवान्वित करने की दिशा में आगे बढ़ें।
दीप प्रज्वलन व अतिथि सत्कार के साथ समारोह का शुभारम्भ हुआ,
उपर्युक्त शुभ अवसर पर पंजाब नेशनल बैंक मंडल मण्डल के मुख्य प्रबंधक रोहिताश्व इंद्रेन ने उपस्थित सभी प्रमुख महिला अतिथियों ; देश की सुप्रसिद्ध कथाकार आरती जायसवाल ,यूनिसेफ की वन्दना त्रिपाठी,इंटरनेशनल जैपलिंग चैम्पियन शबा बतुल आब्दी, क्षमा
श्रीवास्तव व शिप्रा को सम्मान स्वरूप पुष्पगुच्छ , पुस्तक और स्मृतिचिह्न भेंट करते हुए बधाई व शुभकामना दी। उन्होंने कहा ;कि महिलाओं ने अपनी कार्यकुशलता से अपने लक्ष्य हासिल किए हैं ,हमारी संस्कृति में सभी नारियां वन्दनीय हैं।
अन्य अतिथियों ने भी अपनी सफलता व संघर्ष के विषय में बताते हुए अपने विचार व्यक्त किए।
आयोजक मण्डल की समस्त महिला कर्मचारी ,पुरुष कर्मचारी व अधिकारीगण की पत्नियों की गायन प्रतिभा ने समारोह में संगीत घोल दिया व विभा पांडेय,अल्पना यादव,सुष्मिता सिंह,मयूरी तिवारी,भावना यादव,मोनिका अग्रवाल, जिन्होंने अपनी ऊर्जा, व कार्यशैली ,कुशल संचालन व संगीतमय प्रस्तुति से अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए सभी का मन मोह लिया।
उपर्युक्त शुभ अवसर पर प्रिणी यादव, अंकिता,मधुरेश,गौरव,इशिता आदि उपस्थित रहे।

बेंगलुरु की राही राज और प्रीति राज का अभिनंदन किया गया दिल्ली में सविता चडढा जन सेवा समिति द्वारा
  • कलश फाउंडेशन बेंगलुरु के संस्थापक और कवि और उनके साथ पधारी प्रीति राज का अभिनंदन सम्मान किया गया सविता चड्डा जन सेवा समिति के द्वारा।

नयी दिल्ली : राष्ट्रीय ख्यातिनाम साहित्यकार,पत्रकार और लेखक सविता चढ्ढा (दिल्ली )को तुलसी सम्मान देने के लिए बेंगलुरु से पधारे थे राही राज। रानीबाग,दिल्ली के सविता चढ्ढा जन सेवा समिति सभागार में आयोजित सम्मान समारोह में कलश फाउंडेशन के संस्थापक राही राज व प्रीति राज ने प्रसिद्ध साहित्यकार,कथाकार सविता चढ्ढा को उत्कृष्ठ लेखन व साहित्य सृजन के लिए “तुलसी सम्मान” से संम्मानित किया।सम्मान स्वरूप प्रतिक चिन्ह व अंग वस्त्र प्रदान किया। इस मौके पर नोयडा की उदयीमान कवयित्री डॉ कल्पना पांडेय का भी सम्मान किया गया।


समारोह को संबोधित करते हुवे कलश फाउंडेशन के संस्थापक राही राज ने कहा सविता चडढा को बहुआयामी प्रतिभा बताते हुवे उनकी लेखन यात्रा का वर्णन करते हुवे बताया कि सविता चड्ढा 1984 से लगातार लेखन कार्य कर रही है और विभिन्न विधाओं पर इनकी 47 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है।इनकी कहानियों पर शोध कार्य हो चुके हैं ।आपकी साहित्यिक साधना अतुलनीय है।


अभिनंदन के पश्चात आयोजित काव्य संगोष्ठी में सविता चढ्ढा जन सेवा समिति की ओर से बेंगलुरु से पधारे राही राज, प्रीति  राज का सविता चढ्ढा ने चंदन की माला और प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मान किया । इस अवसर पर उन्हें अपनी पुस्तकों का एक सेट की भेंट किया।संगोष्ठी में डॉ कल्पना पांडेय , डॉ सविता उपाध्याय,  डॉ पुष्पा सिंह बिसेन, डॉ प्रोफेसर रवि शर्मा, अमोद कुमार, विनोद पाराशर , राजकुमार श्रीवास्तव, राही राज, प्रीतिराज ने अपनी एक से बढ़कर एक रचनाओं की बेहतरीन प्रस्तुति से कार्यक्रम के चार चांद लगा दिए।सभी कवियों के द्वारा किए गए काव्य पाठ में विभिन्न रंग शामिल रहे और सौहार्दपूर्ण वातावरण में यह अभिनंदन समारोह और काव्य गोष्ठी सफल और सार्थक रही।

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शिल्पी चड्डा स्मृति सम्मान 2021- परिणामों की घोषणा

शिल्पी चड्डा स्मृति सम्मान, 2021-  परिणामों की घोषणा

सविता चड्डा जन सेवा समिति द्वारा प्रत्येक वर्ष 12 दिसंबर को दिए जाने वाले चार पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है।

शिल्पी चड्डा स्मृति सम्मान :  डॉ. मंजु रूस्तगी, चेन्नई

हीरो में हीरा सम्मान: ओम प्रकाश प्रजापति, ट्रू मीडिया, दिल्ली

गीतकारश्री सम्मान :  डॉ. मधु चतुर्वेदी,गजरौला 

साहित्यकार सम्मान : राजेंद्र नटखट , दिल्ली

डॉ मंजु रूस्तगी, चेन्नई द्वारा भेजे गए लेख को इस बार चुना गया है  शिल्पी चड्डा स्मृति सम्मान 2021 के लिए। उल्लेखनीय है कि इस सम्मान के अंतर्गत  ₹5100 की नगद राशि के साथ प्रतीक चिन्ह, प्रमाण पत्र, अंगवस्त्रम, पुष्प माला आदि से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान वरिष्ठ साहित्यकार सविता चड्डा द्वारा अपनी बेटी की स्मृति  शुरू किया  है।

इस अवसर पर  शिल्पी चड्डा स्मृति सम्मान  के अलावा उपरोक्त  तीन महत्वपूर्ण  सम्मान भी प्रदान किए जाने हैं जिन्हें प्रतीक चिन्ह, प्रमाण पत्र, अंगवस्त्रम और माल्यार्पण द्वारा एक गरिमा पूर्ण आयोजन  में इस समारोह में सम्मानित  किया जाना है।

देशभर से प्राप्त प्राप्त लेखों में से 20 अन्य ऐसे साहित्यकारों के लेखों को भी चुना गया है जिन्हें इस समारोह में प्रतीक चिन्ह प्रधान कर सम्मानित किया जाएगा:

1.डॉक्टर घमंडी लाल अग्रवाल, गुरुग्राम

 2. डॉक्टर दर्शनी प्रिया, दिल्ली 

3. डॉक्टर कल्पना पांडेय, नोएडा 

4. डॉ अंजू गहलोत, दिल्ली 

5. निहाल च॔द शिवहरे,झांसी

6. सुरेखा शर्मा, गुरुग्राम 

7. डा. दुर्गा सिन्हा,फरीदाबाद 

8. सरला मेहता, इंदौर

9. अभिमन्यु सिंह, रायबरेली

10. मुकेश कुमार ऋषि वर्मा,आगरा

11. डा. अलका शर्मा,दिल्ली

12. रश्मि संजय श्रीवास्तव, लखनऊ

13. सविता स्याल, गुरुग्राम

14. डॉ शकुंतला मित्तल,

15. सविता मिश्रा, बेंगलुरु

16. सरिता गुप्ता ,दिल्ली 

17. डॉक्टर पुष्प लता ,मुजफ्फरपुर

18. सोनिया सोनम, पानीपत 

19. शशि कोछर, रोहतक

20. यति शर्मा, दिल्ली

21. अंजु भारती, दिल्ली

उपरोक्त के अलावा प्राप्त सभी लेखों को समिति द्वारा  एक पुस्तक में भी समायोजित करने की योजना है। समिति के अध्यक्ष सुभाष चडढा ने देश भर से इस सम्मान के लिए लेख भेजने के लिए सभी लेखकों, कवियों और साहित्यकारों का आभार प्रकट भी किया और उन्हें शुभकामनाएं और बधाई दी।

Raebareli Nirala Smriti Sansthan Dalmau

डॉ.रसिक किशोर सिंह नीरज को पांच अलग-अलग संस्थाओं द्वारा भव्य समारोह में राष्ट्रीय गीतकार के रूप में उनकी प्रकाशित कृतियों पर सम्मानित किया गया।


Raebareli Nirala Smriti Sansthan Dalmau:रायबरेली निराला स्मृति संस्थान डलमऊ सहित 21 फरवरी 2021 रविवार को प्रयागराज माघ मेला में आयोजित काव्य रस परिवार द्वारा श्रेष्ठ काव्य सर्जक सम्मान तथा अवध साहित्य अकादमी द्वारा साहित्य शिरोमणि सम्मान तारिका विचार मंच द्वारा साहित्य विभूति सम्मान एवं भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ द्वारा साहित्यकार अभिनंदन समारोह एवं कवि सम्मेलन ग्रंथ विमोचन के अवसर पर डॉ.रसिक किशोर सिंह नीरज को पांच अलग-अलग संस्थाओं द्वारा भव्य समारोह में राष्ट्रीय गीतकार के रूप में उनकी प्रकाशित कृतियों पर सम्मानित किया गया। उक्त अवसर पर डॉ नीरज सम्मानित करने वाली सभी संस्थाओं के प्रति अपना आभार प्रकट करते हुए कृतज्ञता ज्ञापित किया तथा मां सरस्वती की कृपा और आत्मीय जनों का स्नेह पूर्ण आशीर्वाद बताते हुए अपना एक मुक्तक कवियों की महत्ता बताते हुए प्रयाग कार्यक्रम में प्रस्तुत किया—

उजाला जमाने को देता है रवि अंधेरा दिनों से मिटाता है कवि।
सुनाकर कार्यक्रम को ऊंचाईयां प्रदान किया।

कार्यक्रम संयोजक सर्वश्री डॉ. भगवान प्रसाद उपाध्याय रहे समारोह अध्यक्ष अशोक कुमार स्नेही विशिष्ट अतिथि डॉ. बालकृष्ण पांडे ,श्याम नारायण श्रीवास्तव ,डॉ.रसिक किशोर सिंह नीरज डॉ. शंभुनाथ त्रिपाठी अंशुल ,डॉ कृष्ण कुमार चतुर्वेदी मैत्रेय,दिनेश प्रताप सिंह चित्रेश, रामप्यारे प्रजापति सुल्तानपुर, आनंद सिंघनपुरी( छत्तीसगढ़) जगदंबा प्रसाद शुक्ल तथा स्वामी कल्पनेश जी, योगेंद्र कुमार मिश्र विश्वबंधु रहे मुख्य अतिथि के रुप में ज्योतिषाचार्य डॉ. रामेश्वर प्रपन्नाचार्य शास्त्री जी महाराज रहे।
मुख्य रूप से कार्यक्रम में( म. प्र.)से पधारे प्रो. परमानंद तिवारी प्राचार्य तथा डॉ.कृष्णावतार त्रिपाठी राही भदोही ,जनकवि जय प्रकाश शर्मा प्रकाश ,राम लखन चौरसिया, रामनाथ प्रियदर्शी सुमन, राकेश मालवीय मुस्कान, जगदंबा प्रसाद शुक्ल, डॉ.सीताराम सिंह विश्वबंधु ,विष्णु दत्त मिश्र प्रसून ,डॉ .राजेंद्र शुक्ल, डॉ. वीरेंद्र कुसुमाकर ,रचना सक्सेना, अभिषेक केशरवानी, बालेंदु मिश्र सारंग, आभा मिश्रा, सतीश चंद्र मिश्र चित्रकूट ,आकाश प्रभाकर उत्तराखंड आदि प्रमुखरूप से रहे।

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