शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान शाहाना परवीन को मिला
  • कला-संस्कृति,साहित्य और सामाजिक सरोकारों को समर्पित सविता चड्ढा जन सेवा समिति ने दिए चार सम्मान
  • हीरों में हीरा सम्मान प्रसून लतांत
  • साहित्यकार सम्मान डॉ संजीव कुमार
  • शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान शाहाना परवीन
  • गीतकारश्री सम्मान रंजना मजूमदार

नयी दिल्ली : सविता चड्ढा जन सेवा समिति, दिल्ली द्वारा हिन्दी भवन में चार महत्वपूर्ण सम्मान प्रदान किए गए । अपनी बेटी की याद में शुरू किए सम्मानों में, अति महत्वपूर्ण “हीरों में हीरा सम्मान” इस बार गांधीवादी विचारक प्रसून लतांत को, साहित्यकार सम्मान साहित्यकार एवं प्रकाशक डॉ संजीव कुमार और शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान शाहाना परवीन और रंजना मजूमदार को गीतकारश्री सम्मान महामहोपाध्याय आचार्य इंदु प्रकाश और इंद्रजीत शर्मा के कर कमलों से प्रदान किया गया। अनिल जोशी और राजेश गुप्ता की उपस्थिति ने कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की । शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान समारोह की संस्थापक एवं महासचिव, एवं साहित्यकार सविता चड्ढा ने  शाहाना परवीन को सम्मान के साथ साथ पाँच हज़ार एक सौ रुपए की नकद राशि भी प्रदान की और देश भर से पधारे लेखकों, कवियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ये सम्मान माँ और बेटी के मधुर संबंधों को समर्पित है।

अपनी बेटी के लिए पिछले सात साल से प्रारम्भ इन सम्मानों के लिए सविता चड्ढा की सराहना 

इस अवसर पर प्रसून लतांत ने स्वयं को हीरों मे हीरा सम्मान दिये जाने पर समिति का आभार व्यक्त किया और सभा को संबोधित करते इन सम्मानों को दिए जाने को साहित्य में सकारात्मकता के रूप में लिए जाना कहा। अपनी बेटी के लिए पिछले सात साल से प्रारम्भ इन सम्मानों के लिए सविता  की सराहना की । इस अवसर पर डॉ.संजीव कुमार, डॉ स्मिता मिश्रा। शकुंतला मित्तल ने अपने विचार रखें और इन सम्मानों की निष्पक्षता और चुने जाने की प्रक्रिया अपनी बात कही ।

इस वर्ष प्राप्त पुस्तकों में से अन्य 14 लेखकों की पुस्तकों का चयन भी किया था। इस अवसर पर डॉ विनय सिंघल निश्छल को उनकी पुस्तक, संबंध, व्यक्त अव्यक्त,  नाज़रीन अंसारी को ,मां और लफ्जों का संगम पुस्तक के लिए ,. अर्चना कोचर, को तपती ममता में गूंजती किलकारियां संग्रह के लिए , आशमा कौल को स्मृतियों की आहट के लिए ,. राही राज को उनकी पुस्तक पिता के लिए,. कमल कपूर को जिएं तो गुलमोहर के तले, के लिए  रत्ना भादोरिया को “सामने वाली कुर्सी” के लिए ,डॉ पुष्पा सिंह बिसेन को उनके उपन्यास “भाग्य रेखा” के लिए,. अंजू कालरा दासन ‘नलिनी’ को उनके संग्रह “आईना सम्बन्धों का” के लिए , यति शर्मा को उनकी पुस्तक “आधी रात की नींद”,  हेमलता म्हस्के को “”अनाथों की माँ सिंधुताई” के लिए शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान समारोह ” में सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर जापान, लंदन, अमेरिका के आलावा दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, मध्य प्रदेश, लखनऊ,आगरा, राजस्थान, मुरादाबाद, इंदौर,बैंगलोर , पंजाब, नोएडा और दिल्ली के साहित्यकार और गणमान्य उपस्थित थे । कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ कल्पना पांडेय ने किया ।

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शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान-2023 प्रविष्ठियाँ आमंत्रित

शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान-2023 प्रविष्ठियाँ आमंत्रित

New Delhi : प्रत्येक वर्ष की भांति, इस वर्ष भी 12 दिसम्बर, 2023 को ‘’शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान’’ हिंदी भवन, दिल्ली में दिये जाने है। भारत वर्ष में रहने वाले, किसी भी आयु वर्ग के, महिला-पुरूष, लेखक इसमें भाग ले सकते हैं।

  • शिल्पी चडढा स्मृति सम्मान में भाग लेने के लिए संबंधों पर आधारित, (दिसंबर 2022 से नवंबर 2023 के दौरान प्रकाशित ) पुस्तकें आमंत्रित हैं (मां, पिता, देश, भाई, बहन आदि शीर्षक पर ),संबंधों पर प्रकाशित (किसी भी विधा पर ,काव्य संग्रह, लेख संग्रह,नाटक, उपन्यास, कहानी संग्रह आदि ) अपनी पुस्तक की दो प्रतियां कृपया निम्नलिखित पते पर भिजवांंये: सविता चड्ढा जन सेवा समिति (रजि), E.51, Deep Vihar, Rohini Sec.24 (आदर्श हॉस्पिटल के पास ), दिल्ली 110042.पर स्पीड पोस्ट /डाक से भेज सकते हैं। पुस्तक भेजने की सूचना, अपने परिचय और फोन नंबर, संपर्क पते के साथ मेल करना अनिवार्य है। (मेल savitawriter@gmail.com ).

आपकी पुस्तक मिलने के पश्चात आपको मेल पर पुष्टि कर दी जाएगी कि आपकी पुस्तक सम्मान हेतु प्राप्त हो गई है ।

  • शिल्पी चड्डा स्मृति सम्मान के अंतर्गत चयनित एक पुस्तक को सम्मान स्वरूप नकद धनराशि 5100 रूपये के साथ , प्रतीक चिन्ह, अंगवस्त्रम आदि गरिमामय समारोह में प्रदान किया जायेगा। प्राप्त पुस्तकों में से चुनी गई 10 अन्य पुस्तकों के लेखकों को भी इस सम्मान समारोह में सम्मानित किया जाएगा।

समारोह के बारे में सूचना आपको 15 नवम्बर, 2023 तक दे दी जायेगी।

  • उपरोक्तानुसार आप अपनी पुस्तकें अधिकतम 15 अक्टूबर , 2023 तक भेज सकते हैं।

डाँ. सविता चडढा
संस्थापक: शिल्पी चड्डा स्मृति सम्मान समारोह

‘आत्मनिर्भरता के साथ सम्मान की चाह’ : आरती जायसवाल

रायबरेली : पंजाब नेशनल बैंक द्वारा सिविल लाइन स्थित एक होटल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की संध्या को आयोजित समारोह के शुभअवसर पर उपस्थित जन को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि देश की सुप्रसिद्ध कथाकार आरती जायसवाल ने कहा कि महिला दिवस को मनाने का अर्थ महिलाओं की उपलब्धियों, उनके जज्बे, उनकी ऐतिहासिक यात्राओं और उनके जीवन को याद करना उनसे प्रेरणा लेना तथा स्वयं को सिद्ध करने की प्रतिज्ञा लेना है।’
प्रथम बार १९०८ ईसवी में अमेरिकी महिलाएं पुरुषों की अपेक्षा समान कार्य के बदले कम पारिश्रमिक मिलने के विरुद्ध बड़ी संख्या में (लगभग पन्द्रह हजार महिलाएं )सड़कों पर उतरी और उसी के परिणाम स्वरूप सबसे पहले साल १९०९ईसवी में न्यूयॉर्क में एक समाजवादी राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में महिला दिवस का आयोजन किया गया था। फिर १९१७ईसवी में सोवियत संघ ने इस दिन को एक राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया। तब से धीरे-धीरे तमाम देशों में इस दिन को मनाने की शुरुआत हुई। अब लगभग सभी देशों में इसे मनाया जाता है।


आत्मनिर्भरता के साथ लैंगिक समानता की चाह में आज की नारी ने प्रत्येक क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। अंतरिक्ष से लेकर समुद्रतल तक उन्होंने खुद को सिद्ध किया है। समाज के बने – बनाए रूढ़िवादी ढांचे को चुनौती देते हुए अपने मार्ग में आने वाली समस्त बाधाओं को पार करते हुए विश्व भर की नारियां आज अपना परचम लहराने में सफ़ल हैं।


इस बार अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की थीम है ‘ जेंडर एक्यूलटी टुडे फॉर सेस्टनेबल टुमारो ‘ जिसमें हम लैंगिक समानता की बात करते हैं और चाहते हैं कि मजबूत भविष्य के लिए हमारा आज सम्मान और आशा से भरा हुआ हो इसका तात्पर्य यह कदापि नहीं कि हम पुरुष जैसा बनना चाहते हैं ,ईश्वर ने सभी जीवों की रचना अलग की है और उसकी बनाई हुई प्रत्येक कृति अनमोल और अद्भुत है किसी से किसी की तुलना हो ही नहीं सकती । स्त्री – पुरुष दोनों महत्त्वपूर्ण है दोनों ही सम्मान के योग्य भी, समानता का तात्पर्य यहां सम्मान के भाव से है ,इसके लिए आवश्यक है ;कि समाज के विचारों में परिवर्त्तन हो और यह तभी सम्भव होगा जब किसी के घर में बेटी के जन्म पर भी बधाई दी जाए , इसकी शुरुआत हमें ही करनी होगी कि जब हम पुत्री को भी जन्म दें तो हमें सवा किलो लड्डू बांटने का अधिकार होना चाहिए ‘ बेटी के जन्म पर गर्व हो कि यह भी हमारे राष्ट्र का सुनहरा भविष्य है अंतरिक्ष में उड़ान भरने वाली कोई परी जन्मी है,कोई महान व्यक्तित्व जन्मी है ‘ जो न जाने किस क्षेत्र में अपने को सिद्ध करेगी। उसे हेय दृष्टि से न देखकर उसके प्रति आशान्वित और गौरवान्वित होते हुए जब यह समाज आगे बढ़ेगा तो नारी के मार्ग के अवरोध खुद समाप्त हो जायेंगे वे जितना अच्छा कार्य अभी कर रही हैं उससे भी अच्छा कार्य कर पाएंगी।
विकासशील परिवार और समाज से ही राष्ट्र विकसित होता है ,नारियों के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव आवश्यक है जिससे राष्ट्र के विकास और यश में निरंतर प्रगति होती रहेगी।
आइए खुद पर गर्व करते हुए अपने राष्ट्र को गौरवान्वित करने की दिशा में आगे बढ़ें।
दीप प्रज्वलन व अतिथि सत्कार के साथ समारोह का शुभारम्भ हुआ,
उपर्युक्त शुभ अवसर पर पंजाब नेशनल बैंक मंडल मण्डल के मुख्य प्रबंधक रोहिताश्व इंद्रेन ने उपस्थित सभी प्रमुख महिला अतिथियों ; देश की सुप्रसिद्ध कथाकार आरती जायसवाल ,यूनिसेफ की वन्दना त्रिपाठी,इंटरनेशनल जैपलिंग चैम्पियन शबा बतुल आब्दी, क्षमा
श्रीवास्तव व शिप्रा को सम्मान स्वरूप पुष्पगुच्छ , पुस्तक और स्मृतिचिह्न भेंट करते हुए बधाई व शुभकामना दी। उन्होंने कहा ;कि महिलाओं ने अपनी कार्यकुशलता से अपने लक्ष्य हासिल किए हैं ,हमारी संस्कृति में सभी नारियां वन्दनीय हैं।
अन्य अतिथियों ने भी अपनी सफलता व संघर्ष के विषय में बताते हुए अपने विचार व्यक्त किए।
आयोजक मण्डल की समस्त महिला कर्मचारी ,पुरुष कर्मचारी व अधिकारीगण की पत्नियों की गायन प्रतिभा ने समारोह में संगीत घोल दिया व विभा पांडेय,अल्पना यादव,सुष्मिता सिंह,मयूरी तिवारी,भावना यादव,मोनिका अग्रवाल, जिन्होंने अपनी ऊर्जा, व कार्यशैली ,कुशल संचालन व संगीतमय प्रस्तुति से अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए सभी का मन मोह लिया।
उपर्युक्त शुभ अवसर पर प्रिणी यादव, अंकिता,मधुरेश,गौरव,इशिता आदि उपस्थित रहे।

बेंगलुरु की राही राज और प्रीति राज का अभिनंदन किया गया दिल्ली में सविता चडढा जन सेवा समिति द्वारा
  • कलश फाउंडेशन बेंगलुरु के संस्थापक और कवि और उनके साथ पधारी प्रीति राज का अभिनंदन सम्मान किया गया सविता चड्डा जन सेवा समिति के द्वारा।

नयी दिल्ली : राष्ट्रीय ख्यातिनाम साहित्यकार,पत्रकार और लेखक सविता चढ्ढा (दिल्ली )को तुलसी सम्मान देने के लिए बेंगलुरु से पधारे थे राही राज। रानीबाग,दिल्ली के सविता चढ्ढा जन सेवा समिति सभागार में आयोजित सम्मान समारोह में कलश फाउंडेशन के संस्थापक राही राज व प्रीति राज ने प्रसिद्ध साहित्यकार,कथाकार सविता चढ्ढा को उत्कृष्ठ लेखन व साहित्य सृजन के लिए “तुलसी सम्मान” से संम्मानित किया।सम्मान स्वरूप प्रतिक चिन्ह व अंग वस्त्र प्रदान किया। इस मौके पर नोयडा की उदयीमान कवयित्री डॉ कल्पना पांडेय का भी सम्मान किया गया।


समारोह को संबोधित करते हुवे कलश फाउंडेशन के संस्थापक राही राज ने कहा सविता चडढा को बहुआयामी प्रतिभा बताते हुवे उनकी लेखन यात्रा का वर्णन करते हुवे बताया कि सविता चड्ढा 1984 से लगातार लेखन कार्य कर रही है और विभिन्न विधाओं पर इनकी 47 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है।इनकी कहानियों पर शोध कार्य हो चुके हैं ।आपकी साहित्यिक साधना अतुलनीय है।


अभिनंदन के पश्चात आयोजित काव्य संगोष्ठी में सविता चढ्ढा जन सेवा समिति की ओर से बेंगलुरु से पधारे राही राज, प्रीति  राज का सविता चढ्ढा ने चंदन की माला और प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मान किया । इस अवसर पर उन्हें अपनी पुस्तकों का एक सेट की भेंट किया।संगोष्ठी में डॉ कल्पना पांडेय , डॉ सविता उपाध्याय,  डॉ पुष्पा सिंह बिसेन, डॉ प्रोफेसर रवि शर्मा, अमोद कुमार, विनोद पाराशर , राजकुमार श्रीवास्तव, राही राज, प्रीतिराज ने अपनी एक से बढ़कर एक रचनाओं की बेहतरीन प्रस्तुति से कार्यक्रम के चार चांद लगा दिए।सभी कवियों के द्वारा किए गए काव्य पाठ में विभिन्न रंग शामिल रहे और सौहार्दपूर्ण वातावरण में यह अभिनंदन समारोह और काव्य गोष्ठी सफल और सार्थक रही।

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शिल्पी चड्डा स्मृति सम्मान 2021- परिणामों की घोषणा

शिल्पी चड्डा स्मृति सम्मान, 2021-  परिणामों की घोषणा

सविता चड्डा जन सेवा समिति द्वारा प्रत्येक वर्ष 12 दिसंबर को दिए जाने वाले चार पुरस्कारों की घोषणा कर दी गई है।

शिल्पी चड्डा स्मृति सम्मान :  डॉ. मंजु रूस्तगी, चेन्नई

हीरो में हीरा सम्मान: ओम प्रकाश प्रजापति, ट्रू मीडिया, दिल्ली

गीतकारश्री सम्मान :  डॉ. मधु चतुर्वेदी,गजरौला 

साहित्यकार सम्मान : राजेंद्र नटखट , दिल्ली

डॉ मंजु रूस्तगी, चेन्नई द्वारा भेजे गए लेख को इस बार चुना गया है  शिल्पी चड्डा स्मृति सम्मान 2021 के लिए। उल्लेखनीय है कि इस सम्मान के अंतर्गत  ₹5100 की नगद राशि के साथ प्रतीक चिन्ह, प्रमाण पत्र, अंगवस्त्रम, पुष्प माला आदि से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान वरिष्ठ साहित्यकार सविता चड्डा द्वारा अपनी बेटी की स्मृति  शुरू किया  है।

इस अवसर पर  शिल्पी चड्डा स्मृति सम्मान  के अलावा उपरोक्त  तीन महत्वपूर्ण  सम्मान भी प्रदान किए जाने हैं जिन्हें प्रतीक चिन्ह, प्रमाण पत्र, अंगवस्त्रम और माल्यार्पण द्वारा एक गरिमा पूर्ण आयोजन  में इस समारोह में सम्मानित  किया जाना है।

देशभर से प्राप्त प्राप्त लेखों में से 20 अन्य ऐसे साहित्यकारों के लेखों को भी चुना गया है जिन्हें इस समारोह में प्रतीक चिन्ह प्रधान कर सम्मानित किया जाएगा:

1.डॉक्टर घमंडी लाल अग्रवाल, गुरुग्राम

 2. डॉक्टर दर्शनी प्रिया, दिल्ली 

3. डॉक्टर कल्पना पांडेय, नोएडा 

4. डॉ अंजू गहलोत, दिल्ली 

5. निहाल च॔द शिवहरे,झांसी

6. सुरेखा शर्मा, गुरुग्राम 

7. डा. दुर्गा सिन्हा,फरीदाबाद 

8. सरला मेहता, इंदौर

9. अभिमन्यु सिंह, रायबरेली

10. मुकेश कुमार ऋषि वर्मा,आगरा

11. डा. अलका शर्मा,दिल्ली

12. रश्मि संजय श्रीवास्तव, लखनऊ

13. सविता स्याल, गुरुग्राम

14. डॉ शकुंतला मित्तल,

15. सविता मिश्रा, बेंगलुरु

16. सरिता गुप्ता ,दिल्ली 

17. डॉक्टर पुष्प लता ,मुजफ्फरपुर

18. सोनिया सोनम, पानीपत 

19. शशि कोछर, रोहतक

20. यति शर्मा, दिल्ली

21. अंजु भारती, दिल्ली

उपरोक्त के अलावा प्राप्त सभी लेखों को समिति द्वारा  एक पुस्तक में भी समायोजित करने की योजना है। समिति के अध्यक्ष सुभाष चडढा ने देश भर से इस सम्मान के लिए लेख भेजने के लिए सभी लेखकों, कवियों और साहित्यकारों का आभार प्रकट भी किया और उन्हें शुभकामनाएं और बधाई दी।

Raebareli Nirala Smriti Sansthan Dalmau

डॉ.रसिक किशोर सिंह नीरज को पांच अलग-अलग संस्थाओं द्वारा भव्य समारोह में राष्ट्रीय गीतकार के रूप में उनकी प्रकाशित कृतियों पर सम्मानित किया गया।


Raebareli Nirala Smriti Sansthan Dalmau:रायबरेली निराला स्मृति संस्थान डलमऊ सहित 21 फरवरी 2021 रविवार को प्रयागराज माघ मेला में आयोजित काव्य रस परिवार द्वारा श्रेष्ठ काव्य सर्जक सम्मान तथा अवध साहित्य अकादमी द्वारा साहित्य शिरोमणि सम्मान तारिका विचार मंच द्वारा साहित्य विभूति सम्मान एवं भारतीय राष्ट्रीय पत्रकार महासंघ द्वारा साहित्यकार अभिनंदन समारोह एवं कवि सम्मेलन ग्रंथ विमोचन के अवसर पर डॉ.रसिक किशोर सिंह नीरज को पांच अलग-अलग संस्थाओं द्वारा भव्य समारोह में राष्ट्रीय गीतकार के रूप में उनकी प्रकाशित कृतियों पर सम्मानित किया गया। उक्त अवसर पर डॉ नीरज सम्मानित करने वाली सभी संस्थाओं के प्रति अपना आभार प्रकट करते हुए कृतज्ञता ज्ञापित किया तथा मां सरस्वती की कृपा और आत्मीय जनों का स्नेह पूर्ण आशीर्वाद बताते हुए अपना एक मुक्तक कवियों की महत्ता बताते हुए प्रयाग कार्यक्रम में प्रस्तुत किया—

उजाला जमाने को देता है रवि अंधेरा दिनों से मिटाता है कवि।
सुनाकर कार्यक्रम को ऊंचाईयां प्रदान किया।

कार्यक्रम संयोजक सर्वश्री डॉ. भगवान प्रसाद उपाध्याय रहे समारोह अध्यक्ष अशोक कुमार स्नेही विशिष्ट अतिथि डॉ. बालकृष्ण पांडे ,श्याम नारायण श्रीवास्तव ,डॉ.रसिक किशोर सिंह नीरज डॉ. शंभुनाथ त्रिपाठी अंशुल ,डॉ कृष्ण कुमार चतुर्वेदी मैत्रेय,दिनेश प्रताप सिंह चित्रेश, रामप्यारे प्रजापति सुल्तानपुर, आनंद सिंघनपुरी( छत्तीसगढ़) जगदंबा प्रसाद शुक्ल तथा स्वामी कल्पनेश जी, योगेंद्र कुमार मिश्र विश्वबंधु रहे मुख्य अतिथि के रुप में ज्योतिषाचार्य डॉ. रामेश्वर प्रपन्नाचार्य शास्त्री जी महाराज रहे।
मुख्य रूप से कार्यक्रम में( म. प्र.)से पधारे प्रो. परमानंद तिवारी प्राचार्य तथा डॉ.कृष्णावतार त्रिपाठी राही भदोही ,जनकवि जय प्रकाश शर्मा प्रकाश ,राम लखन चौरसिया, रामनाथ प्रियदर्शी सुमन, राकेश मालवीय मुस्कान, जगदंबा प्रसाद शुक्ल, डॉ.सीताराम सिंह विश्वबंधु ,विष्णु दत्त मिश्र प्रसून ,डॉ .राजेंद्र शुक्ल, डॉ. वीरेंद्र कुसुमाकर ,रचना सक्सेना, अभिषेक केशरवानी, बालेंदु मिश्र सारंग, आभा मिश्रा, सतीश चंद्र मिश्र चित्रकूट ,आकाश प्रभाकर उत्तराखंड आदि प्रमुखरूप से रहे।

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डॉ.रसिक किशोर सिंह नीरज रायगढ़ छत्तीसगढ़ में सम्मानित.

डॉ.रसिक किशोर सिंह नीरज को रायगढ़ छत्तीसगढ़ में किया गया सम्मानित.

 
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रामदास अग्रवाल के स्मृति में सम्पन्न हुआ साहित्य सम्मेलन

तथा स्मृति अंक सहित दो पुस्तकों का हुआ विमोचन ।

रायगढ़ ( छत्तीसगढ़) में ‘नयी पीढ़ी की आवाज’ व छत्तीसगढ़ साहित्य परिवार द्वारा आयोजित साहित्य सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के नामचीन साहित्यकारों की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। साहित्य सम्मेलन में प्रख्यात समाज सेवी व साहित्य प्रेमी स्व. रामदास अग्रवाल द्वारा साहित्य के लिए किए गये कार्यों को साहित्यकारों ने याद करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि दी।
समारोह का आरंभ मा सरस्वती के तैलचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से किया गया। उसके पश्चात उपस्थित साहित्यकारों व साहित्य प्रेमियों तथा रामदास परिवार द्वारा स्व. रामदास अग्रवाल को विनम्र श्रद्धांजलि दी गयी।
यह कार्यक्रम शिक्षाविद व छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार पाठक के मुख्य आतिथ्य और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विनोद कुमार वर्मा की अध्यक्षता तथा वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रसिक किशोर सिंह ’नीरज’के विशिष्ट आतिथ्य में तथा केवल कृष्ण पाठक, राष्ट्रीय कवि डॉ. ब्रजेश सिंह की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ।
इस अवसर पर प्रो.विनय कुमार पाठक ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि साहित्यकारों को साहित्य सृजन के साथ-साथ सामाजिक कार्य करते रहना चाहिए। आज जिस विभूति की स्मृति में यह कार्यक्रम का आयोजन किया गया है, उनसे मैं कुछ समय पूर्व रामकथा के दौरान मिला था। उनके विचारों और कार्यों को मैं इस अवसर पर नमन करता हूं। साहित्यकार समाज को दिशा देने का कार्य करता है। इसीलिए साहित्य को समाज का दर्पण कहते हैं। उन्होने साहित्यकारों से इसी तरह समाज को दिशा देने हेतु साहित्य सृजन करते रहने का भीआह्वान किया।
इस अवसर पर विमोचित पत्रिका नयी पीढ़ी की आवाज स्मृति अंक व आनन्द सिंघनपुरी की किताब ’दिल की आहट’ तथा बाल साहित्यकार शंभूलाल शर्मा ’वसंत’ के ’मैना के गउना’ के बारे में भी प्रकाश डाला।

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सम्मेलन में उपस्थित वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. के. के. तिवारी, डॉ .बृजेश सिंह, डॉ .रसिक किशोर सिंह नीरज (रायबरेली), गजलकार केवल कृष्ण पाठक, डॉ. विनोद कुमार वर्मा, शिव कुमार पांडेय, शम्भू लाल शर्मा ’वसंत’ ने रामदास अग्रवाल को श्रद्धांजलि देते हुए साहित्य पर वक्तव्य दिए। तथा डॉ.नीरज ने अपनी ग़ज़ल – ‘ गहराईयां नदी की किनारों से पूछिये’ सुनाकर समां बांध दिया।
रामदास द्रौपदी फाउंडेशन के चेयरमैन समाजसेवी सुनील रामदास ने कहा कि पूज्य बाबूजी द्वारा दिखाए गये रास्ते परचलकर हम सदैव साहित्य और समाज के कार्यों में सहयोगी बने रहेंगे।
उक्त कार्यक्रम का संचालन साहित्यकार श्याम नारायण श्रीवास्तव ने किया।

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इस साहित्य सम्मेलन में स्थानीय साहित्यकारों में आशा मेहर, डॉ. डी. पी. साहू, सरला साहा, रुसेन कुमार, आनन्द कुमार केड़िया, ऋषि वर्मा, रमेश शर्मा, सुखदेव पटनायक, अरविंद सोनी, मनमोहन सिंह ठाकुर, राकेश नारायण बंजारे ने भी अपने विचार व्यक्त किये। शहर के नन्द बाग में आयोजित इस सम्मेलन में जय शंकर प्रसाद, तेजराम नायक प्रफुल्ल पटनायक, प्रदीप कुमार, रामरतन मिश्रा, धनेश्वरी देवांगन, प्रियंका गुप्ता, हरप्रसाद ढेंढे, पवन दिव्यांशु, राघवेंद्र सिंह, गीता उपाध्याय, प्रदीप उपाध्याय, सनत, हेमंत चावड़ा, डॉ. मणिकांत भट्ट, प्रशांत शर्मा व अन्य बहुत से साहित्यकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंतिम पड़ाव पर नयी पीढ़ी की आवाज के ’स्मृति अंक’ में प्रकाशित रचनाकारों को भी रामदास द्रौपदी फाउन्डेशन द्वारा सम्मानित भी किया गया।
कार्यक्रम के अंत में सुशील रामदास अग्रवाल ने स्व. रामदास अग्रवाल के स्मृति में आयोजित सफल कार्यक्रम के लिए नयी पीढ़ी की आवाज परिवार व साहित्यकारों को धन्यवाद ज्ञापित किया।
डॉ.नीरज को रायगढ़ छत्तीसगढ़ में सम्मानित किए जाने पर रायबरेली के साहित्यकारों में हर्ष और उल्लास व्याप्त है । जनपद के कर्मचारियों ने भी उन्हें बधाई दी।

साहित्यकार सविता चड्ढा को राष्ट्र रत्न की उपाधि/savita chadha

 

साहित्यकार सविता चड्ढा को राष्ट्र रत्न की उपाधि

 

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सविता चड्ढा

प्रोन्नति फाउंडेशन एवं कंट्री आफ इंडिया न्यूज़पेपर द्वारा 26 जनवरी को आयोजित ऑनलाइन सम्मान समारोह में साहित्य और समाज सेवी जानी मानी हस्तियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर दिल्ली की वरिष्ठ साहित्यकार और लेखिका श्रीमती सविता चड्ढा को उनके साहित्यिक योगदान एवं समाज में उत्थान एवं उनकी सक्रियता को देखते हुए “राष्ट्र रत्न उपाधि” से सम्मानित किया गया। इससे पूर्व भी आपको “साहित्य सुधाकर की उपाधि”, “आदर्श महिला सम्मान”, ” दिल्ली गौरव सम्मान”, “साहित्य गौरव सम्मान”, ” सरस्वती सम्मान” आदि मिल चुके हैं। उल्लेखनीय है कि 30 से अधिक वर्षों से जहां आप नारी सेवा सदन के माध्यम से समाज में व्याप्त बुराइयों को समाप्त करने के लिए सक्रिय हैं वहीं साहित्य सृजन के द्वारा आप अपनी महती भूमिका निभा रही हैं।

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आपकी साहित्यिक सक्रियता 1984 से बनी हुई है और अब तक आपकी 41 पुस्तकें विभिन्न विषयों पर प्रकाशित हो चुकी हैं। आपकी कहानियों पर जहां फिल्मों का निर्माण किया गया है , वहीं नाटक मंचन भी हुए हैं और 60 से अधिक कहानियां आकाशवाणी से पंजाबी और हिंदी में प्रसारित हो चुकी हैं। पत्रकारिता पर लिखी आपकी तीन किताबें सहायक ग्रंथ के रूप में कई विश्वविद्यालयों में संस्तुत हैं। आपकी लिखी बाल कहानियाँ कक्षा 6,7,8 के पाठ्यक्रम में शामिल हैं। आपकी कहानियों पर विश्वविद्यालयों में शोध हो चुके हैं। आपकी साहित्यिक यात्रा की बहुत उपलब्धियां है।
समाज सेवी और लेखिका श्रीमती मुक्ता मिश्रा, प्रोन्नति फाउंडेशन की संस्थापक ने श्रीमती सविता चड्ढा का राष्ट्र रत्न उपाधि के लिए चयन किया।

साहित्य सम्मेलन व स्मृति अंक तथा पुस्तक विमोचन

30 जनवरी को  साहित्य सम्मेलन व स्मृति अंक तथा पुस्तक विमोचन

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रायगढ़- रायगढ़ जिला सुर,लय,ताल की नगरी तो है, साथ ही साहित्यिक गतिविधियों में भी अव्वल है। आये दिन विविध विषयों को लेकर कार्यक्रम होते रहते है इसे साहित्यिक गतिविधियों पर यहाँ के साहित्यकारों का गहरा लगाव ही कहा जायेगा। जो इतने तन्मयता और लगन से हर कार्यक्रम को श्रेष्ठ बनाने में कोई कसर नही छोड़ते। लम्बे समय से कोरोना महामारी का हम सबने यातनाएं सहीं।पर समय तो अपनी चाल से निरन्तर चलता रहता है, पूरे निर्लिप्तभाव से। निर्विकार या निर्मिमेष से बिना किसी रुकावट, आधि-व्याधि, रोग-दोष, मोह-माया, राग-द्वेष, अच्छे-बुरे की चिंता कर। दुनिया की सारे दुखों से अनजान अपनी मस्ती में, बस केवल अपने कर्म में डूबा, कितने भी उद्वेलन, खुशियाँ, अवसाद हों समय की गति में कोई अंतर नहीं पड़ता। वह तो बस चैरेवति-चैरेवति की गूँज से आगे बढ़ता ही रहता है। इस महामारी में कितने ही अपने घनिष्ठ जन इस दुनिया से अलविदा हो गए। इसी समय रायगढ़ के पर्यावरण प्रेमी व समाजसेवी रामदास अग्रवाल का दुःखद निधन हो गया। शहर में होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों और हर दुःख-सुख में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष उनका सहयोग रहता था। उन्हीं की स्मृति में एक दिवसीय ’साहित्य सम्मेलन’ व नयी पीढ़ी की आवाज में प्रकाशित उनकी स्मृति अंक तथा पुस्तक विमोचन का कार्यक्रम नंद बाग, कोष्टापारा, नंदेश्वर मन्दिर रोड ’छत्तीसगढ़ साहित्य परिवार व नयी पीढ़ी की आवाज’ के तत्वावधान में आयोजित की गई है। उक्त कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. विनय कुमार पाठक (शिक्षाविद, पूर्व अध्यक्ष, छ. ग.राजभाषा आयोग) और कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. विनोद कुमार वर्मा (वरिष्ठ साहित्यकार), विशिष्ट अतिथि रायबरेली (उत्तरप्रदेश) से डॉ. रसिक किशोर सिंह ’नीरज’, बिलासपुर से वरिष्ठ साहित्यकार केवल कृष्ण पाठक, डॉ. ब्रजेश सिंह की उपस्थिति रहेगी। पुस्तक विमोचन की कड़ी में रायगढ़ के युवा साहित्यकार आनन्द सिंघनपुरी की किताब ’दिल की आहट’ व ’मैना के गउना’ का आमंत्रित अतिथियों के हाथों लोकार्पण होगा। उक्ताशय की जानकारी नयी पीढ़ी की आवाज परिवार से भानुप्रताप मिश्र, श्याम नारायण श्रीवास्तव, सनत व आनन्द सिंघनपुरी ने दी और बताया कि कार्यक्रम आज दिनांक 30 जनवरी दोपहर 12 बजे से आयोजित है तथा कोविड संक्रमण को ध्यान में रखते हुए मास्क लगाकर आने की अपील की है।

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शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान के पल-आशा शैली

सन्तान जब असमय साथ छोड़ दे, वह दुख उत्सव में कैसे बदला जा सकता है यह बात कोई साहित्यकारों से सीखे। दिल्ली की ख्याति लब्ध साहित्यकार  सविता चड्ढा जी से सीखे। आप हर वर्ष दिवंगत बेटी शिल्पी के नाम पर बाल साहित्यकारों को सम्मानित करती हैं।

 दिल्ली में शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान के पल।

आशा शैली

कभी कविता प्रतियोगिता कभी लघुकथा या कहानी। इस बार बाल उपन्यास की बारी थी और यह प्रतियोगिता आपकी इस अकिंचन मित्र  के हिस्से में आई। पुरस्कार में शाल, सम्मान पत्र और स्मृति चिन्ह के साथ इक्यावन सौ का चैक लेकर वापस उत्तराखण्ड लौट रही हूँ। शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान के पल। मेरे बाल उपन्यास ‘कलकत्ता से अण्डमान तक’  को पुरस्कार के लिए चयनित करने वाले जज  श्री ओम प्रकाश सपरा जी और आशीष कांधवे के साथ। श्याम किशोर सहाय एडिटर लोकसभा टीवी, सविता चड्ढा, सुरेश नीरव, डॉ लारी आज़ाद, घमंडी लाल अग्रवाल जी एवं अन्य प्रथम पंक्ति के लेखक। उदासियों  को उत्सव में बदलने का नाम है “शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान” – सविता चड्ढा
पढ़े : दरवेश भारती के साथ आखिरी मुलाकात 

उदासियों को उत्सव में बदलने का नाम हैं “शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान।” 

पिछले चार वर्षों से दिए जा रहे शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान के बारे में बताते हुए सविता चड्ढा ने कहा “उदासियों को उत्सव में बदलने का नाम हैं “शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान।”  सविता चड्ढा जन सेवा समिति, दिल्ली द्वारा हिन्दी भवन में आज चार  महत्वपूर्ण सम्मान प्रदान किए गए । अपनी बेटी की याद में शुरू किए सम्मानों में, अति महत्वपूर्ण “हीरों में हीरा सम्मान ” प्रो डॉ लारी आज़ाद को, साहित्यकार सम्मान , श्री घमंडीलाल  अग्रवाल, शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान, श्रीमती आशा शैली  को और  गीतकारश्री सम्मान ,पंडित सुरेश नीरव को  दिया गया. शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान समारोह की संस्थापक एवं महासचिव, एवं साहित्यकार सविता चड्ढा ने श्रीमती आशा शैली को सम्मान के साथ साथ पाँच हज़ार एक सौ रुपए की नकद राशि भी प्रदान की और देश भर से पधारे लेखकों, कवियों का स्वागत किया। देश भर से प्राप्त पुस्तकों में से कुछ पुस्तकों के लेखकों  को  भी  इस अवसर पर सम्मानित किया गया।  संतोष परिहार को उनकी पुस्तक “पेड़ चढ़े पहाड़”,  डा अंजु लता सिंह को ” सारे जमीं पर”, श्रीमती सूक्ष्म लता महाजन को ” नन्हे मुन्ने””,. श्रीमती वीणा अग्रवाल को उनकी पुस्तक ” नन्ही काव्या”,  श्रीमती सुषमा सिंह को उनकी पुस्तक “नन्हा पाखी” और डॉक्टर सुधा शर्मा को उनकी पुस्तक ” तेरे चरणों में” के लिए सम्मानित किया गया।
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इस अवसर पर मुख्य अतिथि श्रीश्याम किशोर सहाय , एडिटर लोक सभा टीवी, अध्यक्ष श्री  सुभाष चडढा , सविता चडढा द्वारा पुरस्कार वितरित किये गए। विशिष्ट अतिथि डॉ आशीष कांधवे, आधुनिक साहित्य और गगनांचल  के संपादक और साहित्यकार,  श्री ओम प्रकाश सपरा, सेवानिवृत्त  मेट्रोपोलिटन  मेजिस्ट्रेट  और साहित्यकार , श्री ओम प्रकाश प्रजापति,ट्रू मीडिया चैनल संस्थापक की  इस अवसर पर विशेष उपस्थिति रही। मंच संचालन वरिष्ठ कवि  श्री अमोद कुमार ने किया।
इस अवसर पर  श्री/श्रीमती वीणा अग्रवाल, डॉ कल्पना पांडेय , अंजू भारती  और उनके पति , ब्रह्मदेव शर्मा ,जगदीश चावला , राजेंद्र नटखट, मधु मिश्रा, महेश बसोया , डॉ शक्तिबोध, सुमन कुमारी , उमेश मेहता, किशनलाल, जुगल किशोर,, दिनेश ठाकुर, सुषमा सिंह, सूक्ष्मलता महाजन, डॉ अंजुलता सिंह, सोनल चड्ढा, रोहित कुमार, दीपाली चड्ढा ,अभिराज चड्ढा,  भी शामिल हुए. आपके अलावा और भी मित्र उपस्थित रहे, आप सबका तहे दिल से शुक्रिया।