सविता चड्ढा का अनुभव – कलम की शक्ति

सविता चड्ढा का अनुभव – कलम की शक्ति

कलम की शक्ति

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जब किसी नुकीले प्रश्न को मेरी कलम ने उछाल दिया आसमानी सितारों ने मुझे मुश्किलों से निकाल लिया।
– सविता चडढा

मुझे कलम से इतना प्यार हो गया कि मैं जहां भी जाती , सुंदर, आकर्षक, रंग-बिरंगे पैन देखती और उन्हें खरीद लेती थी। महंगे से महंगा और सस्ते से सस्ता पैन अपने पास रखना मेरी आदत में शुमार हो गया था । मुझे याद है एक बार राष्ट्रपति भवन में डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा जी के हाथ में मैंने एक खूबसूरत पेन देखा था जिससे उन्होंने मेरी पुस्तक पर हस्ताक्षर किए थे। मैं उनसे तो वह पेन नहीं मांग पाई लेकिन बाद में मैं नेपाल में एक यात्रा के दौरान मैंने वैसा ही एक पेन दुकान पर देखा ।उस समय उस पेन की कीमत 700 थी । मैंने वह पेन खरीद लिया मेरे साथ मेरे और मित्र भी थे और मेरा बेटा भी था । उन्होंने कहा इतना महंगा पहन खरीदने की क्या जरूरत है। मेरे बेटे सोनल शंटी ने मेरे जवाब देने से पहले ही उन्हें कह दिया था” अंकल शौक की कोई कीमत नहीं होती, मम्मी को सुंदर पैन खरीदने का शौक है ।”
इसी प्रकार जब एक बार श्रीमान साहब सिंह वर्मा , जो दिल्ली के मुख्यमंत्री थे उनके निवास पर एक भव्य साहित्यिक समारोह था और मैंने उन्हें अपनी एक पुस्तक भेंट की तो उन्होंने अपने जेब से मुझे एक खूबसूरत पैन निकालकर दे दिया था। वह पेन भी मेरे पास आज सुरक्षित है। इसी प्रकार पंजाब केसरी के महेंद्र खन्ना भी एक बार मेरे लिए बहुत खूबसूरत पैन लेकर आए थे। समय-समय पर गोष्ठियों में, मित्रों से मुझे बहुत सारे कलम(पैन) मिले हैं और मैंने उन्हें सहेज कर रख लिया है । हालांकि उनमें से कई मैंने उपयोग कर लिए और कई भेंट भी कर दिए हैं।
मित्रों अगर हम कलम की बात करते हैं, कलम की प्रशंसा करते हैं, कलम हमें रास्ता दिखाती है, कलम हमारे लिए भगवान के समान है तो हमें कलम से लिखे जाने वाले एक-एक शब्द को सोच विचार कर लिखना चाहिए। कलम की नोक को सदा सुनहरा और साफ रखना भी हमारा ही उत्तरदायित्व है न ?

मिलती रही मुश्किलें, आंधियां पग पग पर
कलम ने कभी भी होने नहीं बेहाल दिया।

सविता चडढा

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