Laghukatha Pareshani | लघुकथा परेशानी / रत्ना सिंह

Laghukatha Pareshani | लघुकथा परेशानी / रत्ना सिंह


परेशानी– एक कार्यक्रम में जाने के लिए नेताजी घर से निकले ही थे कि पार्टी का एक कार्यकर्ता दौड़कर पास आया और उनके कान में फुसफुसाते हुए कहने लगा कि अभी अभी सूचना मिली है कि आप के चुनावी क्षेत्र में एक लड़की का रेप हो गया है।
आखिर जिस बात का डर था वही हुआ अब उस कार्यक्रम को स्थगित करना पड़ेगा, और ड्राइवर से कहा कि जल्दी से गाड़ी निकालो हमारा वहां पहुंचना बहुत जरूरी है।
सब सत्यानाश हो गया!
लेकिन वहां का माहौल अभी बहुत खराब है अभी आप वहां मत जाइए कार्यकर्ता ने अपनापन दिखाते हुए कहा। बाद में अगर चुनाव नतीजे हमारे पक्ष में नहीं आए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? आखिर पार्टी हमें अपना काम ठीक से ना करने का नोटिस थमा कर बाहर कर देगी। इसलिए अभी हमारा वहां पहुंचना बहुत जरूरी है कि आखिर यह हुआ कैसे जिसको भी ऐसा करना था वह चुनाव—?
नेताजी को परेशानी में देखकर कार्यकर्ता कहने लगा कि वहां जिस लड़की के साथ दुष्कर्म हुआ वह दुष्कर्म करने वाला कोई और नहीं हमारी ही पार्टी का कार्यकर्ता है, और वहां का माहौल बिल्कुल भी ठीक नहीं है।
“क्या कहा तूने? अपनी ही पार्टी का कार्यकर्ता था? तो फिर यह तो आजकल आम बात है —–न इसमें हमारी क्या गलती? बिना मतलब मैं डरा दिया कमबखत ने—-। तुझे पता नहीं अभी पिछले ही दिनों एक मामला ऐसे ही रफा-दफा हुआ है वैसे यह भी हो जाएगा इसमें क्या?
नेता जी ने यह कहते हुए एक लंबी सांस छोड़ी उनके चेहरे पर अब तनिक भी परेशानी नहीं झलक रही थी।

अन्य पढ़े :

हिंदीरचनाकार (डिसक्लेमर) : लेखक या सम्पादक की लिखित अनुमति के बिना पूर्ण या आंशिक रचनाओं का पुर्नप्रकाशन वर्जित है। लेखक के विचारों के साथ सम्पादक का सहमत या असहमत होना आवश्यक नहीं। सर्वाधिकार सुरक्षित। हिंदी रचनाकार में प्रकाशित रचनाओं में विचार लेखक के अपने हैं और हिंदीरचनाकार टीम का उनसे सहमत होना अनिवार्य नहीं है।

यदि आपके पास हिन्दी साहित्य विधा   में कोई कविता, ग़ज़ल ,कहानी , लेख  या अन्य  जानकारी है जो आप हमारे साथ साझा  करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ ईमेल  करें. हमारी  id  है:  [email protected] पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ प्रकाशित  करेंगे. धन्यवाद