Short Stories in hindi | नवोदित कथाकार रत्ना सिंह का जीवन परिचय 

Short Stories in hindi : प्रस्तुत लघुकथा स्वेटर  की लेखिका   रत्ना सिंह  के  द्वारा पाठकों के समक्ष प्रेरणादायी कहानी प्रस्तुत है हमें आशा है कि यह कहानी आपके जीवन में बदलाव जरूर लायेगी। जानते है लेखिका के बारे में –

नवोदित कथाकार रत्ना सिंह का परिचय 

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रत्ना सिंह भदौरिया

 


  • नाम –  रत्ना सिंह

  • जन्म – 1995

  • जन्म स्थान  – रायबरेली 

  •  पेशा -नर्स

  • प्रकाशन-हंस जैसी अनेक पत्र-पत्रिकाओं में लघुकथा वह कहानियां स्वीकृति।

  • सम्मान – स्काउटिंग के क्षेत्र में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित।

  • सम्पर्क-पहाडपुर कासो जिला रायबरेली उत्तर प्रदेश।

  • परिचय –  रायबरेली जनपद की मूल निवासी और इन्दिरा गाँधी राजकीय महाविद्यालय की पूर्व छात्रा रत्ना सिंह भदौरिया नवोदित कथाकार है। इनकी कहानियाँ और लघुकथायें हंस जैसी प्रतिष्ठित पत्रिका के लिए स्वीकृत हुई हैं। कथा जगत की प्रतिष्ठित कथाकार मन्नू भण्डारी रत्ना सिंह की कथा गुरु हैं। वर्तमान में रत्ना सिंह दिल्ली के एक बड़े अस्पताल में स्टाफ नर्स हैं। इनका कहानी संग्रह शीघ्र ही पाठकों के सम्मुख होगा । इस समय रत्ना सिंह एक उपन्यास प्रणीत कर रही हैं।

लघुकथा स्वेटर 

रोज की तरह आज सुबह 9:00 बजे भी बहुत ठंड थी मैंने और रीमा ने जल्दी-जल्दी जूते मोजे सौल स्वेटर टोपी आदि पहनकर पार्क में टहलने चल पड़े रीमा हमारी बड़ी बहन है जो रोज सवेरे मेरे साथ पार्क में टहलने जाती है हम दोनों पार्क में टहलते टहलते वहीं पड़ी एक बेंच पर बैठ गए l हर दिन की तरह देखा कि रेखा आज भी काम पर वही पतला स्वेटर पहनकर जा रही थी वह हमारे घर के थोड़ी दूर पर एक घर में काम करती है वहां काम करने के बाद मेरे घर भी आती है । मैंने पार्क में बैठे बैठे सोचा कि बहुत सारे कपड़े हैं आज इसे भी कुछ गर्म कपड़े दे दूं। मैं घर आकर सबसे पहले अलमारी खोलकर बैठ गई कुछ गर्म कपड़े निकाल कर रख दिए तभी घंटी बजी मैंने दरवाजा खोला अरे! रेखा तू आजा । रेखा कांपती हुई कमर दोहरी कर के अंदर आ गई मैंने उससे कहा ,”देख पहले तो तू इससे एक स्वेटर निकाल कर पहन ले”। उसने कहा ,मेम साहब इतने अच्छे कपड़े यह तो तुमरे ऊपर अच्छे लगत हैं। मैंने कहा नहीं यह सब तेरे लिए जा तू पहन कर आ—-।
अरे तू कितनी सुंदर लग रही है अब कल अब कल से यह पतला वाला स्वेटर पहन कर मत आना और यह भी सारे कपड़े घर लेकर जाना वह तो फूली नहीं समा रही थी उसने जल्दी-जल्दी अपना काम खत्म किया और चली गई।
आज मेरी तबीयत कुछ ठीक नहीं थी ,इसलिए पार्क में टहलने नहीं गई जैसे ही दरवाजे की घंटी बजी दरवाजा खोला तो देखा कि वही पतला स्वेटर पहने कांपती हुई रेखा सामने खड़ी थी,मैंने स्नेह से डांटते हुए कहा ,तुझे कल ही तो स्वेटर दिए थे। उधर से जो आवाज आई वह सुनकर मैं हतप्रभ हो गई।
क्या बताऊं मेम साहब मैं कल जैसे ही यहां से निकली थोड़ी दूर गई तो देखा “एक वृद्ध विधवा महिला सड़क के किनारे पड़ी ठंड से कांप रही थी “।
मैंने समझा कि मुझसे ज्यादा स्वेटर की जरूरत इनको है इसलिए मैंने वह स्वेटर उनको दे दिए।


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Abhimanyu

मेरा नाम अभिमन्यु है इस वेबसाइट को हिंदी साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए बनाया गया इसका उद्देश्य सभी हिंदी के रचनाकारों की रचना को विश्व तक पहचान दिलाना है

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