Hindi diwas poem/हिंदी साहित्य-संसार|शैलेन्द्र कुमार

Hindi diwas poem : भारत के पूर्व प्रधानमन्त्री मनमोहन सिंह ने 10 जनवरी 2006 को प्रति वर्ष विश्व हिन्दी दिवस के रूप मनाये जाने की घोषणा की थी। उसके बाद से भारतीय विदेश मंत्रालय ने विदेश में 10 जनवरी 2006 को पहली बार विश्व हिन्दी दिवस मनाया था।
विश्व हिन्दी दिवस का उद्देश्य विश्व में हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिये जागरूकता पैदा करना, हिन्दी को अन्तरराष्ट्रीय भाषा के रूप में पेश करना, हिन्दी के लिए वातावरण निर्मित करना, हिन्दी के प्रति अनुराग पैदा करना, हिन्दी की दशा के लिए जागरूकता पैदा करना तथा हिन्दी को विश्व भाषा के रूप में प्रस्तुत करना है। सभी सरकारी कार्यालयों में विभिन्न विषयों पर हिन्दी में व्याख्यान आयोजित किये जाते हैं। विश्व में हिन्दी का विकास करने और इसे प्रचारित-प्रसारित करने के उद्देश्य से विश्व हिन्दी सम्मेलनों की शुरुआत की गई और प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ था इसीलिए इस दिन को ‘विश्व हिन्दी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

हिंदी साहित्य-संसार

Hindi diwas poem


विविध विधाओं के खिल रहे

कुसुम यहांँ हिंदी साहित्य-संसार

बहुत सुहाना है ।

शिल्प ताजमहल से भी सुंदर है इसका,

हर गीत कंचन हर शब्द नगीना है।

अनंत अलंकारों का आगार है यहांँ पर,

तीन गुणों की खान नौ रसों का खजाना है।

बिम्बों से साकार हो उठती है काव्य सुषमा,

प्रत्येक भाव लगता जाना पहचाना है ।

कल्पना की उड़ान पंछियों से ऊंची है यहांँ,

यथार्थ चित्रण में सब ने लोहा माना है।

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शैलेंद्र कुमार

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