मैथिलीशरण गुप्त का जीवनवृत्त | Biography of Maithilisharan Gupta

मैथिलीशरण गुप्त का जीवनवृत्त | Biography of Maithilisharan Gupta

  • जन्म- 3 अगस्त सन 1886 ई०
  • श्रावण मास शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि
  • जन्मस्थान- चिरगाँव झांसी।


मैथिलीशरण गुप्त वैष्णव परिवार में जन्मे थे। पिता सेठ राम चरण कवि थे। वे कनक लता नाम से रचनाएं करते थे। गुप्त द्विवेदी युग के प्रमुख और प्रखर कवि थे, जिन्हें राष्ट्रकवि की संज्ञा महात्मा गांधी ने दी थी।
स्वतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ० राजेंद्र प्रसाद ने मैथिलीशरण गुप्त को सन 1952 में राज्यसभा का सदस्य मनोनीत किया किया था। गुप्त जी ने आचार्य महावीर द्विवेदी को अपना अनुयाई माना था।

मैथिलीशरण गुप्त की प्रमुख रचनाएँ-


रंग में भंग, जयद्रथ वध, पंचवटी, त्रिपथगा, किसान, विराट भट, गुरुकुल, साकेत, यशोधरा, द्वापर, सिद्धराज सैरंध्री, नहुष, शकुंतला, भारत भारती, स्वदेश संगीत, वेतालिक, हिंदू, झंकार, मंगलघट आदि कृतियां हैं।
साकेत महाकाव्य गुप्त की कालजयी रचना है, जिसका प्रकाशन सन् 1921 में हुआ। साकेत का अर्थ अयोध्या है। साकेत महाकाव्य में चित्रकूट में सीता जी को खुरपी, कुदाल, चरखा चलाना, वृक्ष लगाना, सिंचाई करना, अपने हाथों से खाना बनाना, सफाई करना आदि संघर्षपूर्ण कार्य करते हुए दिखाया गया है। इस महाकाव्य में करुण रस प्रमुख है। उर्मिला का विरह वर्णन लिखा गया है। सीता राजपाट छोड़ जंगल में आकर अपना प्रत्येक कार्य स्वयं करती हुई कहती हैं-
औरों के हाँथों यहाँ नहीं पलती हूँ,
अपने पैरों खड़ी आप चलती हूँ।
श्रमवारि बिन्दुफल स्वास्थ्य सुचि फलती हूँ,
अपने अंचल से व्यंजन आप झलती हूँ।

यशोधरा कृति का प्रकाशन सन 1933 में हुआ। इस रचना में मुख्य नायिका भगवान गौतमबुद्ध की पत्नी यशोधरा है, जो उर्मिला की भाँति उपेक्षित है। इस ग्रंथ में गद्य-पद्य, दृश्य-श्रव्य का अद्भुत समन्वय है-

अबला जीवन हाय! तुम्हारी येही कहानी–
आँचल में है दूध और आँखों में पानी!

मैथिलीशरण गुप्त की भाषा खड़ी बोली है। भाषा सुबोध सरस भाव व्यंजनापूर्ण है। गुप्त ने अपनी रचनाओं में प्रसाद, माधुर्य, ओज गुण स्थापित किया है। विवरणात्मक गीत काव्य शैली, उपदेश प्रधान शैली की प्रचुरता है।
श्रृंगार और वीर रस की प्रधानता है। उपमा, रूपक, अनुप्रास, उत्प्रेक्षा, विभावना, विरोधाभास, यमक, श्लेष, मानवीकरण अलंकारों का प्रयोग किया गया है। हरिगीतिका, दोहा, सोरठा, गीतिका, घनाक्षरी, सवैया छंद का प्रयोग है।
आपके के नाम से चिरगांव में राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त स्नातकोत्तर महाविद्यालय भी खोला गया है।
राष्ट्रकवि मैथिली शरण गुप्त 12 दिसंबर 1964 को हमेशा के लिए चिरनिद्रा में लीन हो गए और साहित्य जगत का एक तारा अस्त हो गया।

अशोक कुमार गौतम
असिस्टेंट प्रोफेसर (विभागाध्यक्ष हिंदी)
शिवा जी नगर, दूरभाष नगर
रायबरेली (उ.प्र.)
मो. 9415951459

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