bachpan ki yaadein story-संतोष कुमार विश्वकर्मा


“स्कूटर


हम लोग उम्र के उस दौर में थे, जब मन साइकिल से मोटरसाइकिल पर जाने के लिए बेचैन होने लगा था। हम मतलबमैं और मेरे सुपर स्टार दोस्त मियां मोकीम। तो उस समयबजाज सुपरस्कूटर का जलवा था, और मोटरसाइकिल में लोग बहुत कम इंटरेस्ट लेते थे,स्कूटर उस समय सुपर स्टार होती थी।

कभी किसी की स्कूटर खड़ी देख लेते थे हम लोग,तो मोहल्ले के दूसरे लड़को के सामने खूब शेखी बघारते,और अपने आधे अधूरे ज्ञान का प्रदर्शन करते, जैसे,”पहिला गेर ऊपर लगेगा, “चौथे गेर में गाड़ी बहुत भागती है“,  पहिया के नीचे अगर अद्धा गया तो गाड़ी पलट जाएगी और बहुत कुछ जैसे कि हम सब कुछ जानते है।

किसी तरह थोड़ा बहुत हम लोग चलाना जान गए थे।किसी की स्कूटर कभी मिल जाती थी चलाने को तो,बड़ी शान से अपने घर की तरफ जरूर जाते थे,कि देख लो हम भी स्कूटर चलाना जानते है। मोकीम के साथ भी यही सेम सिचुएशन थी, क्योंकि वो और मै अक्सर एक ही गाड़ी पर होते थे।

वो अपने घर के सामने मुझे पीछे बैठाते थे,और मैं अपने घर के सामने मोकीम को पीछे बिठाता था।स्कूटर चलाने का शौक अपने जुनून पर था और उसी बीच एक दुःखद घटना हो गई, मोकीम के अब्बा हुजूर का इंतकाल हो गया, मोकीम के बड़े भाई सिकंदर अपने ससुराल गए थे, तो ये तय हुआ कि, मोकीम जाएं और सिकंदर को अपने साथ लेकर आएं।

बगल से सेठ माताफेर की स्कूटर का प्रबंध हुआ, अगर मैयत का मामला ना होता तो सेठ माताफेर अपना स्कूटर हरगिज़ नहीं देते। मैं मुकीम के मन की स्थिति को बहुत अच्छी तरह से समझ रहा था, उन्हें अब्बा हुजूर की मौत का दुख तो बहुत था लेकिन स्कूटर चलाने का रोमांच उससे कहीं ज्यादा था,मोकीम तुरंत तैयार हो गए जाने के लिए।

जब मैंने सुना कि ,स्कूटर से जाएंगे तो मैं भी फट से तैयार हो गया।मोकीम इस समय डिस्टर्ब है ,मैं इनके साथ जरूर जाऊंगा ,ऐसा झांसा देकर मैं भी मोकीम के साथ हो लिया ,स्कूटर चलाने के लालच में।।

मोकीम के भैया की ससुराल करीब 40 किलोमीटर दूर थी, स्कूटर मोकीम ने ही स्टार्ट किया, और वही चला रहा था ,चार पांच किलोमीटर जाने के बाद मेरे मन मे भी स्कूटर चलाने तीव्र इच्छा हुई ,एक बार थोड़ा कहीं डगमगाया तो मैंने अपनी आवाज को गंभीर करते हुए कहा कि ,”मोकीम तुम्हारे अब्बा की अभी डेथ हुई है तुम्हारी तबियत ठीक नही लग रही रही है,लाओ स्कूटर मैं चलाऊ। लेकिन मोकीम ने तत्काल इनकार कर दिया बोला कि ,”बैठे रहो जल्दी पहुचना है, टाइम कम है। ये सुनते ही दिल बैठ गया,दरअसल स्कूटर चलाने का कीड़ा जितना मुझे काटा था उतना ही मियां मोकीम को भी।

खैर मोकीम ने मुझे स्कूटर नही दिया और आप तो समझ ही रहे होंगे कि मेरे दिल की क्या हालत रही होगी।

।।मेरे बचपन की यादें से संकलित।।

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Abhimanyu

मेरा नाम अभिमन्यु है इस वेबसाइट को हिंदी साहित्य के प्रचार-प्रसार के लिए बनाया गया इसका उद्देश्य सभी हिंदी के रचनाकारों की रचना को विश्व तक पहचान दिलाना है

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