short-story-ye-kya-in-hindi
ये क्या / रत्ना सिंह | Short Story Ye kya in hindi

ये क्या / रत्ना सिंह | Short Story Ye kya in hindi

ये क्या– रोज की तरह आज भी फोन की घंटी बजी बिना उठा ही मैंने समझ लिया कि सतीश ही होगा। वही फोन करता है इतनी सुबह वरना तो कोई उसे इतनी सुबह पूछता ही नहीं। मैंने लपक के फोन उठाया और फुसफुस करके बतियाने लगी। इतने धीरे-धीरे क्यों बोल रही हो, मैंने कहा अरे !पागल किचन में मां है कहीं सुन लेगी तो मेरी खटिया खड़ी हो जाएगी। तब तक मां की आवाज आई बेटा इधर आओ मैं तो यहां कोई और ही चीज में व्यस्त थी ।आई मां झट से फोन काट कर उठ गई। सुनो बेटा आज डॉक्टर के यहां चलना है तुमको मां ने कहा। ठीक है मां! और मैं जल्दी-जल्दी नहा कर हम दोनों डॉक्टर के यहां गए मां ने डॉक्टर को सारी बात बताई जो लक्षण थे हमें शरीर का सूखना खाना ना खाना बाल का झड़ना आदि। मां की बात सुनकर डॉक्टर ने कहा ठीक है आप इनका टेस्ट करवा लीजिए।

अन्य पढ़े : लघुकथा स्वेटर 

जी ठीक है! कहकर हम दोनों टेस्ट करवाने चले गए रिपोर्ट शाम तक आना था इसलिए घर वापस आ गए। मैं फोन को घर पर ही छोड़ गई आकर देखा तो सतीश की हजारों मिस्ड कॉल पड़ी मिली। मैंने उसे फोन किया फोन उठाते ही उसका चिल्लाना शुरु इतनी देर से कहां थी? किससे मिलने गई कितने आशिक बना रखे हैं ना जाने कितनी बातें सुनाने लगा, और फोन काट दिया मैं वहीं जमीन पर बैठ कर रोने लगी रोते-रोते कब सो गई पता ही नहीं चला? शाम के करीब 5:00 बज गए मैंने सतीश को महज अपनी रिपोर्ट के बारे में बताने के लिए फोन लगाया उसका फोन व्यस्त देखकर मेरा माथा ठनका (यह तो मुझे बिना मतलब में क्या-क्या सुना सुना रहा था और खुद—-)। मैं कॉल पर कॉल करती गई करीब 1 घंटे के बाद कॉल रिसीव करके बोला मेरे घर पर मेहमान आए हैं बाद में बात करूंगा मैंने दोबारा कॉल लगाया तो नंबर बंद। मैंने न आव देखा न ताव सीधी सतीश के घर जा धमकी वहां पहुंचकर जो देखा उसे देखने का सामर्थ्य मुझ में नहीं था मेरा शरीर गुस्से से कांपअपने लगा गुस्सा भी सातवें आसमान पर पहुंच गया मैंने खींचकर सतीश के गाल पर थप्पड़ जड़ दिया ,और उसके दोनों कंधे झकझोर कर पूछा अब बताओ तुम्हारे कितने आशिक या मेरे?

अन्य पढ़े : परेशानी

वह फिर भी लड़की की बाहों में बाहें डाल कर खड़ा रहा रोज फोन करके दुनिया भर की बातें सुनाने वाले सतीश साहब बताइए कि तुम्हारे साथ क्या बर्ताव करूं? तुम जो कहोगे वही बर्ताव करूंगी। लेकिन हां मुझे कमजोर मत समझना मैं लड़की हूं ना इसलिए तुम पर रहम करूंगी, और एक बात यह भी सुन लो मैंने तुमको इसलिए फोन किया था कि मेरी रिपोर्ट आ गई और मुझे कैंसर है मैं तो तुमको खुद अपने से अलग करके किसी दूसरी लड़की के साथ दुनिया बसाने के लिए कहने वाली थी। लेकिन चलो कोई नहीं तुमने तो—–। बस इतना ही कहूंगी की यह सब किसी और—-। लड़की हूं इसलिए ।सतीश की नजरें नीचे झुक गई और थोड़ी देर के लिए सन्नाटा छा गया।

Karwa Chauth 2021 | करवा चौथ और आरती

‘करवा चौथ और आरती’

कार्तिक माह का आगमन हो चुका था..आरती मन ही मन बहुत परेशान थी, दो दिन बाद ही करवा चौथ का व्रत होगा..पहली बार अकेले सबकुछ करने की सोच से ही वो उदास थी.. चौबीस वर्ष वो संयुक्त परिवार के स्नेहिल माहौल में रही थी, पर इस वर्ष कुछ ऐसा घटित हुआ कि पतिदेव ने घर छोड़ देने का फैसला किया..वो धक से रह गई.. असंभव लगा उसको आगे जी पाना.. सबसे इतना प्रेम था उसको कि मायका भी भूल गई थी वो..उसको नये घर में शिफ्ट हुए दस माह हो चुके थे, पर पुराने झगड़े जस के तस दिमाग पर कब्जा किये थे.. उसने दिमाग को झटका और तैयारी करने लगी..याद कर-कर के सामान जुटाने लगी.. फिर अचानक फूट-फूट कर रो पड़ी.. “हे भगवान! ये क्या हो गया.. मैं कैसे जी पाऊंगी बिना अम्मा लोगों के..” ये सोच कर वो फिर तनावग्रस्त हो गई..तब तक प्रवेश आ गया..”अरे! तुम फिर रोने लगी? कहकर उसको गले लगा लिया” उसकी ऑंख भी भरी थी, पर छलकने नहीं दिया उसने..”चलो, बाजार हो आते हैं” कहकर वो गाड़ी निकालने लगा..मन से वो भी बहुत अशांत था, पर आरती के सम्मान के लिए उसको ये बड़ा निर्णय लेना पड़ा..उन दोनों के कोई बच्चा नहीं था..पर उनको छोटे भाई के बच्चे अपने ही लगते थे.. उसके दिमाग में उस दिन की वो कड़वी बात फिर उलझ गई.. किचकिच होना तो आम बात थी, पर छोटे भाई का ये कहना कि “मेरे बच्चों को अपना समझना छोड़ क्यों नहीं देते ये लोग..जब इनके अपने बच्चे नहीं हैं तो नहीं हैं, फिर काहे हर समय बड़ी मम्मी बनी फिरती है ये बाॅंझ”..
भाई ने अपनी पत्नी से कहा था..जीने उतरते समय प्रवेश ने जैसे ही ये शब्द सुने धक से रह गया वो! उसको यकीन नहीं हुआ..जो उसके कानों ने सुना..आरती का निश्छल प्रेम.. समर्पण सब व्यर्थ? छि: ..इतनी गिरी हुई सोच थी छोटे की, सहसा उसको घिन आई अपने रिश्ते पर, और तो और माॅं-बाबूजी भी चुप थे.. उसने तुरंत निर्णय ले लिया और .. ..तब तक आरती ने उसका हाथ दबाया.. “क्या सोचने लग गए आप, चलिए ना..”
“ओह! चलो -चलो” कहकर उसने गाड़ी निकाली..
आज करवा चौथ था..
सजी-धजी आरती उसको बहुत प्यारी लग रही थी.. प्रवेश ने प्यार से उससे पूछा “क्या क्या बनेगा आज , सब मैं बनाऊंगा ..तुम बस बता देना”
तभी कालबेल बजी..”मैं देखता हूॅं..”कहकर प्रवेश दरवाजा खोलने बढ़ा..
प्रवेश की “सुनो” की आवाज सुनकर आरती बाहर आई.. “अरे अम्मा..”खुशी से आरती की आवाज थरथरा गई.. सामने अम्मा-पापा खड़े थे! आरती दौड़ कर अम्मा के गले लग गई और फूट-फूट कर रो पड़ी..
“रोते नहीं है आरती, इतने सालों से तुमने बिन कुछ कहे अपनी सारी जि़म्मेदारी निभाई है, तुम्हारे वहाॅं से आने के बाद हम दोनों ने बहुत विचार किया और फिर तुमको अपने घर वापस ले चलने के लिए आ गये..”
“नहीं अम्मा, अब वहाॅं नहीं जाएंगे हम, आप छोटे के साथ ही रहिए वहां.. “प्रवेश ने बहुत खिन्नता से कहा..
“बेटा.. छोटे को दस दिन पहले ही हम लोगों ने घर से निकाल दिया है, तुम लोगों के जाने के बाद से वो बहुत बदल गया था, शराब पीकर ऊटपटांग बोलता था, एक दिन आरती के लिए कुछ ऐसा कहा कि तुम्हारे पापा अपना आपा खो बैठे और उसको घर से निकल जाने को कह दिया..”बताते बताते अम्मा हाॅंफ सी गईं और उन्होंने आरती का हाथ कस के पकड़ लिया..”आप अंदर चलिए अम्मा..सारी बातें दरवाजे पर ही कर लेंगी क्या?” कहते हुए आरती ने दोनों के पैर छुए और दोनों को अंदर लेकर चल दी..
दस महीने बाद अपने घर में पूजा करने बैठी आरती ने अम्मा के साथ चंद्रमा का दर्शन किया और प्रवेश को साज-श्रंगार किये हुए अम्मा के साथ, हॅंसते खिलखिलाते देखकर सहसा भावुक हो गई.. “कितने दिन बाद प्रवेश इतना खुश दिख रहा है”, सोचते हुए आरती.. अपनी अम्मा के साथ करवा चौथ की पूजा संपन्न करने बैठ गई।